
Annamalai BJP Exit: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा बवंडर उठ रहा है जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दक्षिण भारत में बड़ा झटका दे सकता है। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई बहुत जल्द पार्टी को अलविदा कहने वाले हैं। मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक बेहद संवेदनशील मुलाकात के बाद यह तय माना जा रहा है कि अन्नामलाई "कुछ ही दिनों में" अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान कर देंगे। इस खबर ने दिल्ली से लेकर चेन्नई तक के सियासी गलियारों में सस्पेंस और तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
अन्नामलाई और BJP के राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच पिछले कई महीनों से गंभीर मतभेद चल रहे थे। दरअसल, पूर्व IPS अधिकारी अन्नामलाई का मानना था कि तमिलनाडु में BJP को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसी क्षेत्रीय ताकतों से मुकाबले के लिए ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बैसाखी की जरूरत नहीं है। वे चाहते थे कि BJP बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़े और अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाए। इसके उलट, दिल्ली में बैठे आलाकमान का एकमात्र मकसद DMK को हराने के लिए AIADMK के साथ हर हाल में गठबंधन करना था। यही वैचारिक टकराव दोनों के बीच की गहरी खाई बन गया।
पिछले एक साल की क्रोनोलॉजी को देखें तो साफ होता है कि अन्नामलाई को धीरे-धीरे मुख्यधारा की राजनीति से दूर धकेला जा रहा था। इसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई, जब BJP-AIADMK गठबंधन की बातचीत के बीच अन्नामलाई को हटाकर नैनार नागेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। इसके बाद फरवरी 2026 में अन्नामलाई ने अपने पिता की खराब सेहत का हवाला देकर चुनाव प्रभारी पद छोड़ दिया। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब 11 फरवरी, 2026 को उनका नाम विधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति से भी गायब मिला।
अन्नामलाई के 4 जून को आने वाले जन्मदिन से ठीक पहले सोमवार को कोयंबटूर की मुख्य सड़कों और चौराहों पर उनके समर्थकों ने बड़े-बड़े पोस्टर लगा दिए हैं। इन पोस्टरों पर लिखे नारे-"हमारे नेता, आओ और हमारा नेतृत्व करो"-इस बात का साफ इशारा हैं कि जमीन पर उनके प्रशंसक अब किसी बड़े बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। युवाओं और सोशल मीडिया पर अपनी जबरदस्त पकड़ रखने वाले अन्नामलाई के लिए उनके समर्थक किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहे हैं।
भीतरखाने से आ रही खबरों ने इस सस्पेंस को और गहरा कर दिया है कि अन्नामलाई बहुत जल्द अपनी खुद की एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन करेंगे। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह कदम तुरंत नहीं उठाया जाएगा, बल्कि वे सही समय का इंतजार करेंगे। केंद्र सरकार की त्रि-भाषा नीति को समय से पहले लागू करने के फैसले की हालिया आलोचना करके अन्नामलाई ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली के इशारों पर चलने के मूड में नहीं हैं। अब देखना यह है कि तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में 'खाकी' का यह पूर्व नायक क्या नया इतिहास रच पाता है।
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