
महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया एक मामला इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। खुद को महादेव का अवतार बताने वाला अशोक खरात उर्फ ‘भोंदू बाबा’ अब गंभीर आरोपों के घेरे में है। उस पर महिलाओं को झांसे में लेकर यौन शोषण करने का आरोप लगा है।
मामला तब और ज्यादा संवेदनशील हो गया जब इस केस से जुड़े कई कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इन वीडियो के सामने आने के बाद पीड़ित महिलाओं और उनके परिवारों की जिंदगी पर गहरा असर पड़ा है। कई परिवारों ने घर से बाहर निकलना कम कर दिया है और कुछ लोग तो ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को मजबूर हो गए हैं।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो सामने आने के बाद पीड़ितों के परिवार बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। एक पीड़िता के रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मामला इस स्तर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें कई दिनों तक दफ्तर जाना टालना पड़ा। अब उन्होंने अपने ऑफिस से घर से काम करने की अनुमति मांगी है, ताकि परिवार को और ज्यादा मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
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नासिक क्राइम ब्रांच ने अशोक खरात को 17 मार्च को एक महिला की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे 1 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खरात ने धार्मिक अनुष्ठानों और दैवीय शक्तियों का दावा करके 35 साल की एक विवाहित महिला को अपने जाल में फंसाया। महिला का कहना है कि आरोपी ने उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया और सम्मोहन जैसी बातों का सहारा लेकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। यह घटनाएं नवंबर 2022 से दिसंबर 2025 के बीच कई बार होने का आरोप लगाया गया है।
इस मामले की जांच के दौरान कई अहम बातें सामने आई हैं, जिनसे केस और गंभीर हो गया है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि इन वीडियो का इंटरनेट पर फैलना सबसे बड़ी चिंता बन गया है। वीडियो के वायरल होने से पीड़ित परिवारों को मानसिक आघात पहुंच रहा है। इसके अलावा संभावित गवाह भी सामने आने से डर रहे हैं, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कुछ वीडियो अश्लील वेबसाइटों तक भी पहुंच गए हैं, जिन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। जिन मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह की सामग्री प्रसारित करते समय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कई समाचार चैनलों को नोटिस भी भेजे गए हैं। जांच टीम के अनुसार अब तक करीब 170 वेबसाइटों से इस मामले से जुड़े वीडियो हटाए जा चुके हैं। इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है, जिसकी अगुवाई आईपीएस अधिकारी तेजस्वनी सातपुते कर रही हैं।
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