Operation Herof 2.0: कौन थीं हवा बलूच और आसिफा मेंगल? जिन्हाेंने उड़ा दिए पाकिस्तान के होश

Published : Feb 03, 2026, 11:28 AM ISTUpdated : Feb 03, 2026, 11:30 AM IST

STRATEGY SHIFT? बलूचिस्तान में ऑपरेशन हेरोफ 2.0 (Operation Herof 2.0) ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। BLA ने पहली बार महिला चेहरों को सामने लाकर हिंसा को “संघर्ष की कहानी” बताया। क्या यह सिर्फ़ हमला था या दिमाग़ी जंग की नई शुरुआत? 

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BLA Operation Herof 2.0: बलूचिस्तान एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार वजह सिर्फ़ हिंसा नहीं, बल्कि BLA (बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी) की बदली हुई रणनीति है। ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के दौरान BLA ने पहली बार दो महिला चेहरों-आसिफा मेंगल और हवा बलूच को अपने अभियान का प्रतीक बनाकर पेश किया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ़ हमला था या एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक रणनीति?

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BLA ने ऑपरेशन हेरोफ 2.0 में महिलाओं को आगे क्यों किया?

हालिया हमलों में BLA ने पारंपरिक गुमनाम आतंक की जगह व्यक्तिगत कहानियों को चुना। महिला लड़ाकों को सामने लाकर संगठन यह दिखाना चाहता है कि उसका संघर्ष सिर्फ़ हथियारों तक सीमित नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है। इससे न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी तेजी से खिंचता है।

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आसिफा मेंगल कौन थीं?

24 साल की आसिफा मेंगल, नुश्की ज़िले की रहने वाली बताई जाती हैं। BLA के मुताबिक, वह संगठन की एलीट मजीद ब्रिगेड का हिस्सा थीं। ग्रुप का दावा है कि उन्होंने खुद को “फिदायीन” मिशन के लिए तैयार किया था और एक बड़े हमले में भूमिका निभाई थी। उनकी तस्वीरें और नाम सार्वजनिक करना BLA की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि संघर्ष को एक व्यक्तिगत और भावनात्मक चेहरा दिया जा सके।

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हवा बलूच (ड्रोशुम) की कहानी क्या है?

हवा बलूच, जिन्हें ड्रोशुम के नाम से जाना जाता है, को BLA ने सिर्फ एक लड़ाके के रूप में नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतीक के तौर पर पेश किया। ग्रुप का दावा है कि वह सशस्त्र संघर्ष से पहले एक लेखिका और विचारक थीं। कहा जाता है कि उनके पिता भी बलूच आंदोलन से जुड़े थे और पहले ही मारे जा चुके थे। BLA इस पृष्ठभूमि का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए करता है कि यह संघर्ष पीढ़ियों से चला आ रहा है।

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क्या यह रणनीति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है?

सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि महिला लड़ाकों को आगे लाना एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की चाल है। इससे न सिर्फ़ पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि CPEC और ग्वादर जैसे रणनीतिक इलाकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती है। हालिया झड़पों में बड़े पैमाने पर हिंसा और हताहतों की पुष्टि हुई है।

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क्या इससे पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौती और बढ़ेगी?

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि हालिया अभियानों में 145 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए, लेकिन यह भी साफ है कि BLA की रणनीति अब सिर्फ हमलों तक सीमित नहीं रही। प्रतीक, कहानियां और चेहरे अब इस संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं।

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आगे क्या और खतरनाक होगा बलूचिस्तान में?

आसिफा मेंगल और हवा बलूच का उभार दिखाता है कि BLA अब सिर्फ़ लड़ाई नहीं, बल्कि नैरेटिव वॉर लड़ रहा है। पाकिस्तान के सामने अब दोहरी चुनौती है-हिंसा को रोकना और उसके पीछे खड़े प्रतीकों व संदेशों को समझकर जवाब देना।

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