Hilsa Import: खुद बड़ा एक्सपोर्टर, फिर गुजरात से हिलसा क्यों खरीद रहा बांग्लादेश? जानें असली वजह

Published : Sep 20, 2026, 01:10 PM IST

Bangladesh Hilsa Import: हिलसा मछली के सबसे बड़ा उत्पादक बांग्लादेश गुजरात के भरूच से सैकड़ों टन मछली क्यों खरीद रहा है? जानें पद्मा, गंगा और गुजरात हिलसा के स्वाद, कीमत और कारोबार का पूरा अंतर।

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Hilsa Fish Import: हिलसा का बड़ा एक्सपोर्टर बांग्लादेश भारत से क्यों खरीद रहा?

नई दिल्ली: हिलसा (Hilsa Fish) का नाम सुनते ही बंगालियों के मुंह में पानी आ जाता है। इसे मछलियों की रानी कहा जाता है। बांग्लादेश को हिलसा का सबसे बड़ा उत्पादक माना जाता है, और वहां की 'पद्मा की इलिश' दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जो देश दूसरों को हिलसा बेचता है, वही आज भारत-खासकर गुजरात के भरूच-से सैकड़ों टन हिलसा इम्पोर्ट कर रहा है। आखिर इस अनोखे व्यापार और दोतरफा कारोबार के पीछे की असली वजह क्या है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

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Bangladesh Hilsa: पद्मा की हिलसा सबसे खास क्यों?

हिलसा समुद्र में रहने वाली मछली है, लेकिन अंडे देने के लिए नदियों के मीठे पानी की तरफ जाती है। इसी वजह से उसके स्वाद और बनावट में फर्क देखा जाता है। बंगाल में पद्मा हिलसा को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसे ज्यादा फैटी, खुशबूदार और स्वाद में खास माना जाता है। इसकी कीमत कई बार 2,000 से 3,000 रुपये किलो तक पहुंच जाती है। बांग्लादेश ने 2012 में हिलसा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। बाद के वर्षों में भारत को दुर्गा पूजा के आसपास सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति दी गई। 2025 में 1,200 टन की अनुमति मिली थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक करीब 150 टन ही भारतीय बाजार तक पहुंच सकी।

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Gujarat Hilsa: भरूच की मछली बांग्लादेश क्यों पहुंच रही?

अब तस्वीर पलट गई है। बांग्लादेश में स्थानीय हिलसा उत्पादन घटने और कीमत बढ़ने के बीच गुजरात की मछली सस्ता विकल्प बन रही है। 2026 के शुरुआती साढ़े नौ महीनों में भारत से करीब 4.27 लाख किलो हिलसा बांग्लादेश पहुंचने की रिपोर्ट है। इसमें ज्यादातर मछली नर्मदा नदी के पास भरूच इलाके से पकड़ी गई थी। गुजरात की हिलसा भारतीय बाजार में पद्मा या गंगा वाली हिलसा जितनी पसंद नहीं की जाती। इसकी वजह ज्यादा रो यानी मछली के अंडे और अलग स्वाद बताई जाती है। लेकिन बांग्लादेश में यही मछली कम कीमत के कारण काम आ रही है।

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Hilsa Business: स्वाद नहीं, कीमत और प्रोसेसिंग भी बड़ा कारण

बांग्लादेशी जानकारों के मुताबिक गुजरात की हिलसा थोक स्तर पर करीब 500-700 टका किलो पड़ सकती है, जबकि पद्मा और मेघना की हिलसा काफी महंगी है। इसलिए गुजरात की मछली घरेलू खपत के साथ प्रोसेसिंग, मछली के अंडों और सूखी या नमकीन हिलसा बनाने के लिए भी इस्तेमाल होती है। यानी एक ही मछली की कीमत और मांग सीमा पार करते ही बदल जाती है। भारत में जहां पद्मा और गंगा हिलसा स्वाद और परंपरा से जुड़ी है, वहीं बांग्लादेश में गुजरात की हिलसा फिलहाल सप्लाई और कारोबार की जरूरत पूरी कर रही है।

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गुजराती हिलसा: मुख्य बातें (Quick Pointers)
  • पद्मा हिलसा की दीवानगी: बंगालियों के बीच पद्मा नदी की हिलसा की मांग सबसे ज्यादा है, जिसकी कीमत ₹3,000 प्रति किलो तक होती है।
  • सस्ता विकल्प: गुजरात के भरूच से आने वाली हिलसा बांग्लादेश में कम कीमत पर उपलब्ध होती है, जिससे औद्योगिक मांग पूरी होती है।
  • बांग्लादेश का उत्पादन: रिपोर्ट के अनुसार हिलसा उत्पादन 2022 के करीब 5.71 लाख टन से घटकर 2025 में लगभग 5 लाख टन रह गया।
  • प्रोसेसिंग और अंडे: गुजराती हिलसा का इस्तेमाल स्थानीय व्यंजनों, मछली के अंडे निकालने और धूप में सुखाकर नमकीन बनाने के लिए किया जाता है।
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कितने प्रकार की होती है हिलसा मछली? क्या है इसका वैज्ञानिक नाम?
  • हिलसा की पहचान: इसका वैज्ञानिक नाम Tenualosa ilisha है और यह बंगाल व बांग्लादेश की खान-पान संस्कृति का अहम हिस्सा है।
  • पद्मा हिलसा: इसे ज्यादा फैटी, खुशबूदार और स्वादिष्ट माना जाता है। ताजी मछली की मांग सबसे ज्यादा रहती है।
  • गंगा हिलसा: स्वाद में पद्मा के करीब मानी जाती है, लेकिन आम तौर पर इसकी कीमत कम रहती है।
  • गुजरात हिलसा: भरूच और नर्मदा बेसिन की मछली पश्चिम बंगाल में अपेक्षाकृत कम पसंद की जाती है, लेकिन बांग्लादेश में इसकी कम कीमत बड़ा फायदा है।
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बांग्लादेश व्यापार में भी अपना रहा दोहरा रवैया
  • बंगाल में गिरावट: पश्चिम बंगाल में हिलसा उत्पादन भी लंबे समय में काफी घटा है, जिसका एक कारण अत्यधिक मछली पकड़ना बताया गया है।
  • पहचान में मुश्किल: आम खरीदार के लिए गुजरात और गंगा की हिलसा में अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता।
  • प्रोसेसिंग का कारोबार: गुजरात की हिलसा का इस्तेमाल बांग्लादेश में रो निकालने और सूखी/नमकीन मछली जैसे उत्पादों के लिए भी किया जाता है।
  • दोतरफा व्यापार का विरोधाभास: बांग्लादेश भारत को प्रीमियम हिलसा सीमित मात्रा में भेजता है, जबकि खुद भारत से सस्ती हिलसा खरीद रहा है।

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