
Bangladesh Radicalism: बांग्लादेश में लगातार बिगड़ रहे राजनीतिक और सुरक्षा हालात को लेकर अब चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। देश के पूर्व विदेश मंत्री डॉ. ए.के. अब्दुल मोमेन ने सीधे संयुक्त राष्ट्र (UN) से गुहार लगाई है कि वह इस मामले में तुरंत दखल दे। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भेजी गई अपनी आधिकारिक अपील में मोमेन ने चेताया है कि बांग्लादेश के ग्रामीण इलाकों में जिहादी चरमपंथ, कट्टरपंथ और अवैध हथियारों की लूट बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
इतना ही नहीं, पूर्व विदेश मंत्री ने मानवाधिकार उल्लंघनों, हिरासत में मौतों और जेलों में अमानवीय भीड़ की जांच (ऑडिट) कराने की मांग की है। उनका दावा है कि करीब 4 लाख कैदियों को बिना किसी formal चार्ज या जमानत के ठूंस कर रखा गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद ज़रूरी है। मोमेन का कहना है कि देश में तेजी से बदल रहे राजनीतिक और सुरक्षा हालात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखने की जरूरत है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा विश्लेषकों के कान इस घटनाक्रम से खड़े हो गए हैं। अगर बांग्लादेश में यह अस्थिरता और कट्टरपंथ ऐसे ही बढ़ता रहा, तो इसका सीधा असर भारत की सीमावर्ती सुरक्षा पर पड़ेगा। सबसे बड़ी चिंता भारत के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर है, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। यह इलाका बांग्लादेश के बेहद करीब है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि लंबे समय तक अगर बांग्लादेश में अराजकता रही, तो विदेशी दुश्मन ताकतें इस ढील का फायदा उठाकर पूर्वोत्तर भारत की घेराबंदी करने की साजिश रच सकती हैं।
एक और बड़ा खतरा बांग्लादेश के सरकारी शस्त्रागारों (आर्मरी) से लूटे गए हथियारों से पैदा हुआ है। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये लूटे गए घातक हथियार तस्करी के जरिए भारत के ब्लैक मार्केट में पहुंचाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विद्रोही गुटों और संगठित क्रिमिनल नेटवर्क्स के हाथ ये हथियार लग सकते हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में हिंसा का नया दौर शुरू होने का अंदेशा है।
भारतीय सुरक्षा तंत्र बांग्लादेश में जड़े जमा रहे चरमपंथी नेटवर्क्स पर चौबीसों घंटे नज़र बनाए हुए है। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB), नियो-JMB और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (अंसार अल-इस्लाम) जैसे खूंखार संगठन लगातार अपने पैर पसार रहे हैं। ये संगठन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे हैं। एजेंसियों को सिर्फ सीमा पार आतंकवाद का ही डर नहीं है, बल्कि इस बात की भी गहन जांच की जा रही है कि क्या ये नेटवर्क भारत के सीमावर्ती जिलों में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश तो नहीं रच रहे। इसके अलावा 'अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) और ISIS से जुड़े तार भी खंगाले जा रहे हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों पर लगातार हो रहे हमले और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाएं नई दिल्ली के लिए भारी चिंता का सबब हैं। सीमा पार बढ़ती कट्टरपंथी सोच भारत के संवेदनशील इलाकों में सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती है। साफ है कि भारत के लिए यह सिर्फ बांग्लादेश का अंदरूनी सियासी मसला नहीं है। ढीली सीमाएं, हथियारों की तस्करी, कट्टरपंथ का उभार और उग्रवादी नेटवर्क मिलकर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर रहे हैं, जिस पर नई दिल्ली पल-पल नज़र बनाए हुए है।
नई दिल्ली के लिए बांग्लादेश का मौजूदा संकट सिर्फ वहां की घरेलू राजनीति तक सीमित मामला नहीं है। राजनीतिक अस्थिरता, कट्टरपंथ, हथियारों का कथित प्रसार, चरमपंथी नेटवर्क और सीमा की कमजोरियां-ये सभी कारक मिलकर भारत के लिए सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां बांग्लादेश में होने वाले राजनीतिक और सुरक्षा बदलावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खास तौर पर सीमा से लगे इलाकों, हथियारों की संभावित तस्करी और चरमपंथी नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है।
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