
बेंगलुरु: शहर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाली महिला गिग वर्कर्स ने अपने काम के खराब हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। खासकर जो महिलाएं घरों में जाकर साफ-सफाई या ब्यूटीशियन की सर्विस देती हैं, वे टॉयलेट की कमी, आराम करने के लिए जगह न होने और कंपनी के सख्त नियमों से बेहद परेशान हैं।
एक पॉपुलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाली 35 साल की जननी अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं, "एक बुकिंग से दूसरी बुकिंग तक जाते हुए ज्यादातर वक्त धूप में ही गुजरता है। प्यास लगती है, लेकिन मैं पानी पीने से बचती हूं क्योंकि डर लगता है कि टॉयलेट कहां जाऊंगी। कई बार कस्टमर अपने घर का टॉयलेट इस्तेमाल नहीं करने देते। और पब्लिक टॉयलेट भी हर जगह नहीं मिलते।" उन्होंने आरोप लगाया कि इस बारे में कंपनी को बताने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
वर्कर्स के मुताबिक, शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम के बीच उन्हें आराम करने के लिए कोई सही जगह नहीं मिलती। इस वजह से कई महिलाओं को फुटपाथ या बस स्टॉप पर बैठकर आराम करना पड़ता है। 39 साल की ब्यूटीशियन लक्ष्मी (बदला हुआ नाम) ने बताया, "पिछले हफ्ते डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की वजह से मेरी तबीयत बिगड़ गई थी। मुझे उस दिन की बुकिंग कैंसिल करनी पड़ी, लेकिन कंपनी ने मुझ पर कैंसिलेशन पेनल्टी लगा दी। मैं अब दूसरी नौकरी ढूंढ रही हूं क्योंकि लगातार धूप में काम करना मुमकिन नहीं है।"
गिग वर्कर्स का कहना है कि सिर्फ बुकिंग कैंसिल करने पर ही नहीं, बल्कि थोड़ी देर होने पर भी जुर्माना लगाया जाता है। पांच मिनट की देरी पर 10 रुपये का जुर्माना लगना आम बात है। लक्ष्मी ने बताया, "महीने में करीब 30,000 रुपये कमाने के बाद भी, अलग-अलग कटौती के बाद हाथ में 25,000 रुपये से भी कम आते हैं। अगर किसी इमरजेंसी में बुकिंग कैंसिल कर दें तो हमारी रेटिंग गिर जाती है, जिसका असर आगे की कमाई पर पड़ता है।"
38 साल की ब्यूटीशियन सेल्वी (बदला हुआ नाम) ने आरोप लगाया कि बुनियादी मानवाधिकारों पर सवाल उठाने की वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा, "मैं पांच साल से कंपनी में काम कर रही थी। शुरुआत में वे कई तरह के इंसेंटिव देते हैं, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सब खत्म कर देते हैं। पिछले साल से गिग वर्कर्स पर कई सख्त नियम लागू किए गए हैं, लेकिन नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। कभी-कभी हमें लगातार 13 घंटे तक काम करना पड़ता है। बुकिंग मना करने या कैंसिल करने का कोई ऑप्शन नहीं है। जब मैंने इस नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाई और दूसरी महिलाओं को भी बोलने के लिए हिम्मत दी, तो मुझे नौकरी से ही निकाल दिया गया।"
महिला गिग वर्कर्स के ये अनुभव शहर में तेजी से बढ़ रही गिग इकॉनमी का एक स्याह पहलू दिखाते हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी, सेहत से जुड़े जोखिम, कम आमदनी और नौकरी की असुरक्षा, ये सभी समस्याएं उनकी जिंदगी को मुश्किल बना रही हैं। संबंधित कंपनियों और सरकार को इन दिक्कतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।
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