
पटना: बिहार की सियासत में एक बार फिर ऐसा भूचाल आया है जिसने राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। आगामी बिहार विधान परिषद (MLC) चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JD-U) ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। लेकिन इस पूरी चुनावी बिसात में सबसे बड़ा सस्पेंस और धमाका बीजेपी की लिस्ट से हुआ है, जिसने भोजपुरी सिनेमा के 'पावरस्टार' पवन सिंह को सीधे सदन भेजने की तैयारी कर ली है।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से BJP का टिकट स्वीकार करने के बाद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उस घटनाक्रम ने पार्टी और पवन सिंह के रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। अब MLC उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या BJP उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देकर अपने सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव को मजबूत करना चाहती है, या फिर यह केवल एक राजनीतिक समायोजन है। इस सवाल का जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। पवन सिंह के साथ-साथ बीजेपी ने अपने पुराने और भरोसेमंद नेता संजय मयूख को भी दोबारा उम्मीदवार घोषित कर अपनी सांगठनिक पकड़ को मजबूत रखने का संदेश दिया है।
एक तरफ जहां बीजेपी ने ग्लैमर और राजनीति का कॉकटेल तैयार किया है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने बेहद खामोशी से अपना पारंपरिक और मजबूत सोशल इंजीनियरिंग का दांव खेल दिया है। जेडीयू ने शुक्रवार को आगामी उच्च सदन के चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। बिहार विधान परिषद की कुल नौ सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं, जबकि एक सीट पर उपचुनाव होना है। जेडीयू ने इस बार महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सबसे बड़ा दांव लगाया है। पार्टी की इस रणनीति के तहत विधान परिषद में दो महिला चेहरों की एंट्री होने जा रही है, जो नीतीश कुमार के 'साइलेंट वोटर' बैंक को और मजबूत करेगी।
जेडीयू की इस नई लिस्ट में क्षेत्रीय संतुलन को बखूबी साधा गया है। पार्टी ने मधुबनी जिले की रहने वाली भारती मेहता और पश्चिमी चंपारण की शिवरानी देवी प्रजापति को उम्मीदवार घोषित किया है। इन दो महिलाओं के नाम को आगे बढ़ाकर जेडीयू ने आधी आबादी के बीच अपनी पैठ और गहरी करने की कोशिश की है। इसके अलावा, पटना जिले के युवा चेहरे निशांत कुमार को भी जेडीयू ने अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सबसे दिलचस्प मुकाबला उस एक अकेले उपचुनाव वाली सीट पर होने जा रहा है, जिसके लिए पार्टी ने ललन प्रसाद को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है।
बिहार विधान परिषद की इन 10 सीटों (9 नियमित + 1 उपचुनाव) पर होने जा रहे चुनाव से सूबे की राजनीतिक दिशा तय होने वाली है। एक तरफ पवन सिंह की लोकप्रियता के सहारे बीजेपी ने विपक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है, तो दूसरी तरफ जेडीयू के जमीनी उम्मीदवारों ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह सील कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाला वक्त ही बताएगा कि पवन सिंह का यह राजनीतिक पुनर्जन्म बिहार की सत्ता में एनडीए को कितनी मजबूती देता है और क्या महागठबंधन इस घेराबंदी को तोड़ने में कामयाब हो पाता है। सस्पेंस गहरा चुका है, और पटना के सियासी गलियारों में शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।
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