Shocking Medical Study: क्लिनिकली डेड इंसान भी देख सुन सकते हैं? नए रिसर्च में चौंकाने वाला दावा

Published : Feb 14, 2026, 09:39 AM IST

Breaking Science Insight: दिल रुकने के बाद क्या सब खत्म हो जाता है? नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि कार्डियक अरेस्ट के बाद भी कुछ मरीज़ों में दिमाग की एक्टिविटी और चेतना बनी रहती है। EEG डेटा ने मौत की परिभाषा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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Brain Activity After Cardiac Arrest: मौत को लेकर इंसान के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि मरते समय क्या महसूस होता है? क्या दिल रुकने के बाद सब कुछ खत्म हो जाता है, या फिर चेतना कुछ देर तक बनी रहती है? अब एक नई मेडिकल रिसर्च ने इस रहस्य पर से थोड़ा परदा उठाया है। इस स्टडी में ऐसे मरीज़ों के अनुभव सामने आए हैं, जिन्हें डॉक्टरों ने क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया था, लेकिन बाद में वे दोबारा ज़िंदा हो गए।

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क्लिनिकली डेड होने का मतलब क्या होता है?

जब किसी इंसान का दिल धड़कना बंद कर देता है और सांस रुक जाती है, तो उसे कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है। मेडिकल भाषा में ऐसे व्यक्ति को क्लिनिकली डेड माना जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि 10 मिनट के अंदर दिमाग को स्थायी नुकसान हो जाता है, लेकिन यह रिसर्च इसी सोच को चुनौती देती है।

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यह रिसर्च किसने और कहां की?

यह चौंकाने वाली स्टडी डॉ. सैम पारनिया की अगुवाई में की गई, जो NYU लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) से जुड़े हैं। उनकी टीम ने अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीज़ों पर रिसर्च की। यह स्टडी मेडिकल जर्नल Resuscitation में प्रकाशित हुई।

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EEG रिपोर्ट ने क्या चौंकाने वाला खुलासा किया?

  • रिसर्च के दौरान इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) मशीन से यह पाया गया कि
  • दिल की धड़कन रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक भी दिमाग में
  • Gamma, Alpha, Beta, Theta और Delta ब्रेन वेव्स सक्रिय थीं।
  • ये वही वेव्स हैं जो सोचने, याद रखने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं।
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“मैं अपने शरीर से अलग हो गया था”-मरीजों ने क्या बताया?

  • कुछ मरीज़ों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे वे अपने शरीर से बाहर निकल गए हों।
  • वे हॉस्पिटल के कमरे में घूम रहे थे, डॉक्टरों को काम करते देख रहे थे और
  • हर चीज़ साफ़-साफ़ समझ पा रहे थे।
  • उनके मुताबिक, यह कोई सपना या भ्रम नहीं था, बल्कि पूरी चेतना का अनुभव था।
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दिल रुकने के बाद मरीज़ों ने क्या महसूस किया?

रिसर्च में शामिल करीब 40% मरीज़ों ने बताया कि दिल की धड़कन बंद होने के बावजूद उन्हें होश जैसा एहसास हो रहा था। कुछ लोगों ने कहा:

  • वे खुद को अपने शरीर से अलग महसूस कर रहे थे।
  • वे अस्पताल के कमरे में घूमते हुए सब कुछ देख और सुन पा रहे थे।
  • उन्हें ऐसा लग रहा था कि वे पूरी तरह जागरूक हैं।
  • कई मरीज़ों ने उस समय की साफ़-साफ़ यादें भी बताईं, जब डॉक्टर CPR कर रहे थे।
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दिमाग की एक्टिविटी कैसे मापी गई?

मरीज़ों के दिमाग की गतिविधि EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) मशीन से मापी गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्डियक अरेस्ट के 35 से 60 मिनट बाद तक दिमाग में गामा, अल्फ़ा, बीटा, थीटा और डेल्टा वेव्स देखी गईं-जो आमतौर पर सोच, याददाश्त और जागरूकता से जुड़ी होती हैं।

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 क्या मौत के वक्त दिमाग की ‘ब्रेक सिस्टम’ हट जाती है?

डॉ. पारनिया के मुताबिक, जब दिमाग में ऑक्सीजन कम हो जाती है तो उसका “ब्रेक सिस्टम” हट जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में डिसइनहिबिशन कहा जाता है।

इस स्थिति में इंसान:

  • अपनी पूरी ज़िंदगी को एक फिल्म की तरह देख सकता है।
  • अपने कर्म, भावनाएं और फैसले दोबारा महसूस कर सकता है।
  • नैतिकता और सही–गलत के पैमाने पर खुद को आंकता है वो भी बिना किसी डर या झिझक के।।
  • यही वजह है कि कई लोग इसे आत्मा का सफ़र या मौत के बाद का अनुभव मानते हैं।
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तो क्या मौत के बाद भी चेतना बची रहती है?

यह स्टडी किसी धार्मिक मान्यता को साबित नहीं करती, लेकिन यह ज़रूर दिखाती है कि मौत उतनी तुरंत और खाली नहीं होती, जितना हम समझते हैं। वैज्ञानिक अब मानने लगे हैं कि चेतना और दिमाग का रिश्ता अब भी एक अनसुलझा रहस्य है। रिसर्चर्स का कहना है कि ये अनुभव सपनों, भ्रम या नशे से बिल्कुल अलग हैं। ये अनुभव अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और धर्मों के लोगों में काफी हद तक एक जैसे पाए गए।

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