
नई दिल्लीः BRICS Summit 2026: दुनिया में जब बड़े देशों के इकोनॉमी और राजनीतिक ग्रुप की बात होती है तो G7, G20 और BRICS का नाम जरूर आता है। लेकिन BRICS आखिर है क्या? इसमें कौन-कौन से देश हैं? इसकी शुरुआत क्यों हुई? क्या इसकी अपनी कोई करेंसी है? भारत के लिए BRICS कितना जरूरी है? जानें हर सवाल का जवाब...
BRICS कई देशों का एक ग्रुप है। इसका मकसद सदस्य देशों को आपस में बिजनेस, इन्वेस्टमेंट, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, हेल्थ, एग्रीकल्चर और कई दूसरे क्षेत्रों में साथ काम करने का मौका देना है। BRICS कोई NATO जैसा सैन्य गठबंधन नहीं है। यह यूरोपीय यूनियन जैसा ऐसा संगठन भी नहीं है, जिसके अपने एक जैसे कानून हों। यह मुख्य रूप से बातचीत और एक साथ काम करने का एक प्लेटफॉर्म है। BRICS के फैसले आम तौर पर सभी सदस्यों की सहमति से होते हैं। इसका कोई स्थायी हेड ऑफिस या परमानेंट सचिवालय नहीं है। इसकी अध्यक्षता हर साल किसी एक सदस्य देश के पास रहती है।
BRICS नाम 5 देशों के नाम के पहले अक्षरों से बना है।
B – Brazil
R – Russia
I – India
C – China
S – South Africa
आपको बता दें, शुरुआत में South Africa इस लिस्ट में नहीं था। उस समय इसका नाम BRIC था। BRIC में Brazil, Russia, India और China थे। इन देशों के बीच बातचीत 2006 में शुरू हुई और पहली BRIC Leaders Summit 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई। 2010 में South Africa इस ग्रुप का पार्ट बना और 2011 में वह पहली बार BRICS Summit में शामिल हुआ। इसके बाद BRIC का नाम BRICS पड़ गया।
2026 में BRICS में 11 कुल देश शामिल हैं -
1 - Brazil
2 - Russia
3 - India
4 - China
5 - South Africa
6 - Egypt
7 - Ethiopia
8 - Iran
9 - Saudi Arabia
10 - United Arab Emirates
11 - Indonesia
2023 में BRICS का विस्तार हुआ। Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia और UAE भी इस ग्रुप में शामिल हुए। इसके बाद Indonesia भी सदस्य बना और 6 जनवरी 2025 को उसे पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल किया गया।
BRICS की ताकत सिर्फ देशों की संख्या में नहीं है। इसमें दुनिया की बड़ी आबादी, बड़े मार्केट, एनर्जी संसाधन, कच्चा माल, एग्रीकल्चर और तेजी से बढ़ती इकोनॉमी शामिल हैं। ब्राजील के सेंट्रल बैंक के अनुसार- 11 BRICS देश मिलकर दुनिया की करीब 49% आबादी, 36% जमीन, करीब 39% ग्लोबल GDP और करीब 23% इंटरनेशनल मार्केट को लीड करते हैं। यही वजह है BRICS को दुनिया के सबसे पावरफुल उभरते देशों के प्लेटफॉर्म में गिना जाता है।
BRICS का सबसे बड़ा मकसद सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इसके 3 बड़े पार्ट हैं...
1. राजनीति और सिक्यूरिटी: इंटरनेशनल इश्यूज पर एक-दूसरे से बातचीत करना और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग उठाना।
2. इकोनॉमी और पैसा: बिजनेस, इन्वेस्टमेंट, बैंकिंग, पेमेंट और डेवलपमेंट के लिए मिलकर काम करना।
3. लोगों के बीच संपर्क: एजुकेशन, संस्कृति, यूथ, स्पोर्ट्स और लोगों के बीच रिलेशन को मजबूत करना।
भारत BRICS के शुरुआती 4 देशों में शामिल था। इसलिए इस ग्रुप को बनाने में भारत का रोल शुरू से ही रहा है। भारत BRICS में कई इश्यूज पर अपनी बात खुलकर रखता है। इनमें विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, डिजिटल टेक्नोलॉजी, हेल्थ, जलवायु, एनर्जी और व्यापार जैसे टॉपिक शामिल हैं।
भारत के लिए BRICS इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यहां चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ एक ही प्लेटपॉर्म पर बातचीत होती है। साथ ही Brazil, South Africa, Middle East और दूसरे उभरते बाजारों के साथ आर्थिक रिलेशनशिप बढ़ाने का मौका मिलता है।
New Development Bank यानी NDB। इस बैंक को BRICS के 2 पुराने सदस्य देशों ने मिलकर बनाया था। इसका हेडऑफिस Shanghai में है। इसका मकसद विकासशील देशों में सड़क, बिजली, पानी, क्लीन एनर्जी और दूसरी बड़े प्रोजेक्ट के लिए पैसों का अरेंजमेंट कराना है। NDB की अधिकृत पूंजी (Authorized Capital) 100 अरब डॉलर है। बाद में इसमें BRICS के बाहर के कुछ देश भी सदस्य बने। लेकिन आपको बता दें, BRICS का सदस्य बनना अपने आप NDB का सदस्य बनना नहीं है। दोनों अलग सिस्टम हैं।
BRICS ने एक और बड़ा फाइनेन्सियल सिस्टम बनाया है, जिसे Contingent Reserve Arrangement यानी CRA कहा जाता है।लआसान भाषा में कहें तो यह एक तरह की आपसी फाइनेन्सियल मदद की व्यवस्था है। अगर किसी सदस्य देश को विदेशी भुगतान से जुड़ी अचानक दिक्कत आती है तो इस सिस्टम को मदद के लिए यूज किया जाता है। मदद का शुरुआती पैरामीटर 100 अरब डॉलर रखा गया था।
नहीं। BRICS की कोई कॉमन करेंसी नहीं है। यानी BRICS का कोई अलग रुपया, डॉलर या यूरो जैसा नोट नहीं है। BRICS में कुछ देश अपने-अपने देश में चलने वाली करेंसी में बिजनेस बढ़ाने और टाइम पर पेमेंट को आसान बनाने पर काम कर रहे हैं। 2026 में तेज पेमेंट सिस्टम और Central Bank Digital Currency यानी CBDC को आपस में जोड़ने जैसे ऑप्शन पर भी चर्चा हुई है।
BRICS ने 2024 में Partner Country नाम की एक नई व्यवस्था शुरू की। इसमें ऐसे देश शामिल हो सकते हैं जो BRICS के साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन वो परमानेंट सदस्य नहीं होंगे। 2025 में Belarus, Bolivia, Cuba, Kazakhstan, Malaysia, Nigeria, Thailand, Uganda और Uzbekistan को पार्टनर बनाया गया। बाद में Vietnam भी Partner Country बना। यानी सदस्य और पार्टनर देश एक ही चीज नहीं हैं।
BRICS में फैसला किसी एक बड़े देश के आदेश से नहीं होता। सदस्य देशों के बीच सहमति यानी consensus के आधार पर फैसले होते हैं। यही इसकी खासियत भी है और चुनौती भी। क्योंकि इसमें भारत, चीन, रूस, ईरान, सऊदी अरब और दूसरे देशों के अपने-अपने हित हैं। हर इश्यूज पर सभी देशों का एक जैसी राय होना जरूरी नहीं है।
इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका बड़ा बाजार और अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद संसाधन हैं। कहीं ऊर्जा और तेल है, कहीं खेती और खाद्य उत्पादन, कहीं बड़ी आबादी और बड़ा बाजार, तो कहीं टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग की ताकत। अगर ये देश व्यापार, निवेश, भुगतान और विकास के क्षेत्रों में ज्यादा आसानी से साथ काम करते हैं तो इसका असर सिर्फ सदस्य देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर पड़ सकता है।
BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसके सदस्यों के बीच विचारों का मतभेद हैं। जैसे - भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का असर भी BRICS की बातचीत पर पड़ता है। वहीं Middle East के सदस्य देशों के अपने अलग हित हैं। इसलिए BRICS बड़ा तो है लेकिन सभी देश हर मुद्दे पर एक साथ खड़े हों यह जरूरी नहीं है। एक अन्य चैलेंज यह है कि सदस्य देशों की इकोनॉमी, पॉलिटिकल व्यवस्था और फॉरेन पॉलिसी एक जैसी नहीं है।
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। भारत इस साल BRICS के जरिए आर्थिक सहयोग, डिजिटल पेमेंट, व्यापार, टेक्नोलॉजी, हेल्थ, एनर्जी और Global South से जुड़े मुद्दों पर जोर दे रहा है। भारत में 2026 BRICS Summit भी होने वाला है। ऐसे समय में जब दुनिया में बिजनेस, युद्ध, एनर्जी, डॉलर, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल संस्थाओं को लेकर बड़े बदलाव चल रहे हैं, BRICS की बैठक काफी अहम मानी जा रही है। बता दें, भारत की अध्यक्षता में इससे पहले BRICS की कई बैठकें नई दिल्ली में हो चुकी हैं, जैसे-
9–10 फरवरी: BRICS Sherpas की बैठक
14–15 मई: BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक
22–23 जून: BRICS National Security Advisers की बैठक
अब तक 2025 तक 17 BRICS शिखर सम्मेलन हो चुके हैं। 2026 का 18वां BRICS Summit भारत में हो रहा है। आइए जानते हैं BRICS मिटिंग की पूरी लिस्ट...
| साल | BRICS Summit की जगह | देश |
| 2009 | येकातेरिनबर्ग | रूस |
| 2010 | ब्रासीलिया | ब्राजील |
| 2011 | सान्या | चीन |
| 2012 | नई दिल्ली | भारत |
| 2013 | डरबन | दक्षिण अफ्रीका |
| 2014 | फोर्टालेजा | ब्राजील |
| 2015 | ऊफा | रूस |
| 2016 | गोवा | भारत |
| 2017 | श्यामेन | चीन |
| 2018 | जोहान्सबर्ग | दक्षिण अफ्रीका |
| 2019 | ब्रासीलिया | ब्राजील |
| 2020 | मॉस्को (वर्चुअल) | रूस |
| 2021 | नई दिल्ली (वर्चुअल) | भारत |
| 2022 | बीजिंग (वर्चुअल) | चीन |
| 2023 | जोहान्सबर्ग | दक्षिण अफ्रीका |
| 2024 | कजान | रूस |
| 2025 | रियो डी जेनेरियो | ब्राजील |
| 2026 | नई दिल्ली | भारत |
नोटः 2020, 2021 और 2022 में वर्चुअल तरीके से शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था।
भारत ने अब तक 3 बार BRICS Summit की मेजबानी कर चुका है, अब 2026 में चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है -
2012 - नई दिल्ली
2016 - गोवा
2021 - नई दिल्ली (वर्चुअल)
और अब - 2026 नई दिल्ली
कॉन्टेन्ट सोर्सः BRICS Brazil के आधिकारिक दस्तावेज, भारत के विदेश मंत्रालय, Brazil Central Bank और New Development Bank के आंकड़ों पर आधारित है यह कॉन्टेन्ट।
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