Bundelkhand Expressway Solar Project: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे देश का पहला सोलर एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जहां रफ्तार के साथ 550 मेगावाट बिजली पैदा होगी। जानिए कैसे यह परियोजना लाखों घरों को रोशन करेगी और यूपी को ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाएगी।
उत्तर प्रदेश का पहला ‘सोलर एक्सप्रेसवे’: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से रफ्तार के साथ होगी बिजली की पैदावार
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि अब वे विकास और नवाचार की नई पहचान बनते जा रहे हैं। प्रदेश में करीब 15 एक्सप्रेसवे हैं—कुछ चालू हैं, कुछ निर्माणाधीन और कुछ प्रस्तावित। इन्हीं में से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सबसे खास माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के साथ-साथ बिजली भी पैदा होगी।
यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा, पर्यावरण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
27
सोलर एक्सप्रेसवे की अनोखी अवधारणा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को यूपीडा (UPEDA) सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित कर रही है। इसका मकसद है कि सड़क के आसपास उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जाए। आने वाले समय में इससे न सिर्फ बिजली की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि सरकारी खर्च में भी बड़ी बचत होगी।
37
296 किलोमीटर में बिछेगा सोलर नेटवर्क
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 296 किलोमीटर है। इस पूरे मार्ग के दोनों किनारों पर 15 से 20 मीटर की दूरी तक बड़े-बड़े सोलर पैनल लगाए जाने की योजना है। खास बात यह है कि इसके लिए अलग से जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। पहले से चिन्हित सरकारी जमीन का उपयोग कर इस परियोजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
इस सोलर प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद करीब 550 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे लाखों घरों को बिजली सप्लाई की जा सकेगी। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने की भी योजना है, जिससे ई-मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।
57
किन जिलों से होकर गुजरता है एक्सप्रेसवे
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जिलों से होकर गुजरता है। इसकी शुरुआत चित्रकूट के भरतकूप के पास गोंडा गांव में एनएच-35 से होती है और यह इटावा के कुदरैल गांव तक जाता है, जहां यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। इस कनेक्टिविटी से बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रदेश के बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधा लाभ मिलेगा।
67
अन्य एक्सप्रेसवे पर भी हो रहा अध्ययन
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की सफलता को देखते हुए गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को लेकर अध्ययन किया जा चुका है। यदि ये योजनाएं लागू होती हैं, तो सालाना ऊर्जा खपत में करीब 6 करोड़ रुपये तक की बचत संभव मानी जा रही है।
77
विकास और पर्यावरण का संतुलन
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। सोलर ऊर्जा के जरिए यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को न सिर्फ तेज रफ्तार देगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।