
Byju Raveendran Jail Singapore: यह कहानी भारत के स्टार्टअप इतिहास के सबसे बड़े और सबसे सुनहरे सपने के टूटने की है। कभी देश की सबसे कीमती एडटेक (EdTech) कंपनी के रूप में पूजी जाने वाली Byju's, जिसका मूल्यांकन साल 2022 में आसमान छूते हुए $22 बिलियन (लगभग ₹1.8 लाख करोड़) तक पहुँच गया था, आज अर्श से फर्श पर आ गिरी है। आज इस दिग्गज कंपनी का नेटवर्थ 'शून्य' भी नहीं, बल्कि माइनस 8,245 करोड़ रुपये हो चुका है। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब इसके संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने उनकी गैर-मौजूदगी में छह महीने की जेल की सज़ा सुना दी। कभी दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर ज्ञान बांटने वाला यह अरबपति आज दुबई में छिपा बैठा है। आखिर कैसे बेलगाम लालच और अंधी महत्वाकांक्षा ने इस एडटेक साम्राज्य की कब्र खोद दी?
सस्पेंस और कानूनी दांव-पेचों के बीच इस ताज़ा विवाद की शुरुआत तब हुई जब सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन को अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाने और अदालत की अवहेलना का दोषी पाया। यह कानूनी जाल 'कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी' (QIA) की एक सहायक कंपनी ने बुना था।
अदालत के सख्त आदेश के मुताबिक:
हालांकि, रवींद्रन ने इसे केवल एक "प्रक्रियात्मक अवमानना" (Procedural Contempt) बताया है और दावा किया है कि कर्जदाताओं (GLAS Trust और QIA) के साथ समझौते की बातचीत अंतिम दौर में है। लेकिन कानून का शिकंजा अब कस चुका है।
गणित के एक साधारण शिक्षक से अरबपति बनने वाले बायजू रवींद्रन को असली पंख कोविड-19 महामारी के दौरान मिले। जब स्कूल बंद थे, तब पैसा पानी की तरह बह रहा था। शाहरुख़ खान से लेकर लियोनेल मेसी तक कंपनी के ब्रांड एंबेसडर थे। लेकिन इसी बीच एंट्री हुई 'कॉर्पोरेट लालच' की। Byju's ने बिना मजबूत बुनियाद तैयार किए 2019 से 2022 के बीच अंधाधुंध तरीके से कंपनियों को खरीदना शुरू किया। कंपनी ने लगभग $2.5 से $3.6 बिलियन (करीब ₹20,000-₹30,000 करोड़) सिर्फ दूसरी कंपनियों को निगलने में फूंक दिए:
जैसे ही महामारी थमी, स्कूल खुले और ऑनलाइन पढ़ाई का गुब्बारा फूट गया। कमाई रुक गई, लेकिन कंपनियों को खरीदने का कर्ज और भारी-भरकम मार्केटिंग का खर्च बढ़ता गया। नतीजा? कंपनी को एक ही साल में 4,588 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ।
Byju's के एक टॉप एग्जीक्यूटिव का कबूलनामा…“हमें पता था कि जहाज डूबने वाला है, लीडरशिप बड़े विज़न के पीछे भाग रही थी और नीचे जमीनी स्तर पर लोग अपनी सैलरी का इंतजार कर रहे थे। हमें बहुत गिल्ट (अपराधबोध) महसूस होता था...”
साम्राज्य को ढहने से बचाने के लिए सेल्स टीम पर 14-15 घंटे काम करने का खूनी दबाव बनाया गया। टारगेट पूरा करने के लिए गरीब और कमज़ोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को जबरन EMI के जाल में फंसाकर महंगे कोर्सेज बेचे गए। आज लाखों माता-पिता के पैसे डूब चुके हैं, और जिन टैबलेट्स को कभी हज़ारों रुपये में बेचा गया था, वे आज ग्रे मार्केट और कबाड़ के भाव बिक रहे हैं।
सबसे क्रूर असमानता यह रही कि जब कंपनी डूब रही थी, तब शीर्ष अधिकारियों और संस्थापकों की निजी सुख-सुविधाएं सुरक्षित थीं, जबकि छोटे कर्मचारियों को सिर्फ एक फोन कॉल के जरिए नौकरी से निकाल दिया गया और महीनों तक उनका वेतन रोक दिया गया।
अमेरिका की डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट से लेकर भारत के दिवालियापन अदालतों तक, Byju's आज दर्जनों मुकदमों और कुप्रबंधन के आरोपों से घिरी हुई है। कर्जदार गिद्धों की तरह संपत्तियों पर झपट रहे हैं। इन सबके बीच, सस्पेंस इस बात का है कि दुबई में बैठे बायजू रवींद्रन के करीबी सहयोगियों का दावा है कि वे अब भी भारत लौटने और इस शून्य हो चुके कारोबार को फिर से खड़ा करने की उम्मीद पाले हुए हैं। लेकिन क्या ₹8,245 करोड़ के निगेटिव वैल्यूएशन, जेल की सजा और टूटे हुए भरोसे के मलबे से कोई दोबारा किंग बन सकता है? यह स्टार्टअप इतिहास का सबसे बड़ा और कड़वा सबक बन चुका है।
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