
Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय ने इससे पहले नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा सौंपा था। अब ट्रस्टी कृष्ण मोहन को नए महासचिव की नियुक्ति होने तक कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। ट्रस्ट की बैठक राम जन्मभूमि परिसर स्थित अतिथि गृह में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई, जहां कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि एक बार जब चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया, तो उसे स्वीकार करना ट्रस्ट की औपचारिक जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने इस्तीफा स्वीकार करने के साथ-साथ चंपत राय के वर्षों के योगदान की भी सराहना की। स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि वह चंपत राय को तीन दशक से अधिक समय से जानते हैं और उनके अनुसार सबसे बड़ी चूक उन लोगों पर अत्यधिक भरोसा करना था, जिन्होंने कथित रूप से ट्रस्ट की व्यवस्था का गलत फायदा उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नजर में यह लापरवाही का मामला है, न कि किसी आपराधिक भूमिका का।
कार्यवाहक महासचिव बनाए गए कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करना और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना होगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति जांच में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने माना कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और श्रद्धालुओं के बीच अविश्वास की स्थिति बनी है। इसे दूर करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा।
राम जन्मभूमि परिसर में आयोजित बैठक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और निजी वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया। इस बीच चढ़ावे के कथित गबन की जांच कर रही एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पहले ही राज्य सरकार को सौंप चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच जारी है। हालांकि, अब तक चंपत राय, अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। वहीं, फैजाबाद बार एसोसिएशन के कुछ अधिवक्ताओं ने इनके खिलाफ भी पुलिस में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
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