Char Dham Yatra 2026: बद्रीनाथ कपाट 23 अप्रैल को खुलेगा, जानिए समय, रजिस्ट्रेशन, इतिहास और अन्य डिटेल

Published : Apr 22, 2026, 12:34 PM IST

चार धाम यात्रा 2026 शुरू, बद्रीनाथ मंदिर कपाट 23 अप्रैल सुबह 6:15 बजे खुलेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, QR पास व मेडिकल सुविधा लागू। केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री के बाद बद्रीनाथ यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इतिहास, मार्ग व सुरक्षा व्यवस्था अपडेट।

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Badrinath Temple Opening Date 2026: उत्तराखंड की पवित्र चार धाम यात्रा 2026 आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ तीर्थयात्रा की शुरुआत हुई, जिसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। अब सभी की निगाहें बद्रीनाथ धाम पर टिकी हैं, जहां 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे कपाट खोले जाएंगे। इसके साथ ही हिमालय की घाटियों में आस्था का सबसे बड़ा पर्व अपने चरम पर पहुंचेगा।

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बद्रीनाथ धाम: जहां धरती और दिव्यता मिलती है!

चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित 108 दिव्य देशमों में से एक है। यह स्थल न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां ऋषि नर-नारायण ने तपस्या की थी और बाद में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर को पुनः स्थापित किया।

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कपाट खुलने का समय और यात्रा की तैयारी

मंदिर समिति के अनुसार, बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल सुबह 6:15 बजे खोले जाएंगे। प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया है। श्रद्धालु registrationandtouristcare.uk.gov.in पर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा QR-आधारित पास सिस्टम, मेडिकल कैंप और ट्रैकिंग सुविधाएं भी लागू की गई हैं, क्योंकि इस बार लगभग 60 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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केदारनाथ मंदिर में मोबाइल फ़ोन पर प्रतिबंध क्यों है?

केदारनाथ मंदिर के भीतर मोबाइल फ़ोन पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है ताकि मंदिर की पवित्रता बनी रहे और श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर हो सके। मंदिर समिति का उद्देश्य मंदिर की मर्यादा बनाए रखना और फ़ोटो खींचने या वीडियो बनाने से होने वाले व्यवधानों को रोकना है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिससे इस पवित्र स्थान पर श्रद्धा और सम्मान के महत्व पर ज़ोर दिया जा सके।

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कैसे पहुंचें?

  • हवाई मार्ग से: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, जो देहरादून से लगभग 35 किमी दूर स्थित है, बद्रीनाथ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है; बद्रीनाथ यहाँ से लगभग 314 किमी की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा दिल्ली से दैनिक उड़ानों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से बद्रीनाथ तक मोटर-योग्य सड़कों द्वारा पहुंचा जा सकता है, और टैक्सियां आसानी से उपलब्ध हैं।
  • 2. रेल मार्ग से: बद्रीनाथ का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो NH58 पर लगभग 295 किमी दूर स्थित है। ऋषिकेश पूरे भारत के प्रमुख गंतव्यों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जहाँ नियमित रूप से ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं। वहाँ से, सड़क मार्ग द्वारा बद्रीनाथ पहुँचा जा सकता है। ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली, जोशीमठ और अन्य आस-पास के कस्बों से टैक्सियाँ और बसें उपलब्ध हैं।
  • 3. सड़क मार्ग से: बद्रीनाथ, उत्तराखंड के प्रमुख स्थानों से मोटर चलने लायक सड़कों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। नई दिल्ली में ISBT कश्मीरी गेट से हरिद्वार, ऋषिकेश और श्रीनगर के लिए बसें उपलब्ध हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, उखीमठ, श्रीनगर और चमोली जैसे शहरों से बद्रीनाथ के लिए बसें और टैक्सियाँ आसानी से मिल जाती हैं। बद्रीनाथ, राष्ट्रीय राजमार्ग 58 के ज़रिए गाज़ियाबाद से जुड़ा हुआ है।
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आस्था की अंतिम मंजिल: बद्रीनाथ का रहस्य और दिव्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बद्रीनाथ मंदिर में भगवान विष्णु की काले पत्थर से बनी ध्यानमग्न मूर्ति स्थापित है। इसे 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा पुनः स्थापित किया गया था। यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मोक्ष और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता है। चार धाम यात्रा 2026 के साथ एक बार फिर हिमालय में आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहां हर कदम पर “जय बद्री विशाल” की गूंज श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभूति दे रही है।

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