
रायपुर। बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है। यह आयोजन जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और पारंपरिक जीवनशैली को संरक्षित करने और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। इस उत्सव में पारंपरिक नृत्य, मांदर-बांसुरी जैसे वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा, काष्ठ, बांस और धातु शिल्प, साथ ही जनजातीय खान-पान की समृद्ध झलक देखने को मिलती है। बस्तर पण्डुम स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम करता है। इस आयोजन में बस्तर के विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगे, जो बस्तर की आत्म-अस्मिता को जीवंत रूप में सामने लाएगा।
इस वर्ष का बस्तर पण्डुम आयोजन लोकप्रियता के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ चुका है। अब यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का विराट उत्सव बन गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में विकासखंड स्तर की प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या तीन गुना से अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बस्तरवासियों की अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के प्रति जागरूकता और गर्व को दर्शाता है। दंतेवाड़ा जिला 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सबसे आगे रहा है। इसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों से भी हजारों प्रतिभागियों ने अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज कराई है।
बस्तर की मिट्टी की खुशबू और यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर पूरे संभाग में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से चयनित 84 दल और 705 कलाकार इन तीन दिनों में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। मुख्य आकर्षण हों-
संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में 12 अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके साथ ही 56 प्रतिभागी पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों की खुशबू और स्वाद से दर्शकों को आकर्षित करेंगे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियां, चित्रकला, शिल्प कला, पारंपरिक आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराएगा।
बस्तर पण्डुम 2026 की सबसे खूबसूरत तस्वीर है महिलाओं की बढ़ती भागीदारी। संभाग स्तर पर पहुंचे 705 कलाकारों में 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह संतुलित भागीदारी दिखाती है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजने और आगे बढ़ाने में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर, बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता, जन-भागीदारी और सांस्कृतिक विविधता के साथ एक अविस्मरणीय लोक महोत्सव बनने की ओर अग्रसर है।
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