Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में जनजातीय महोत्सव का किया शुभारंभ

Published : Feb 07, 2026, 06:32 PM IST
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सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने जनजातीय संस्कृति, शिक्षा, विकास और शांति की दिशा में हो रहे बदलावों की सराहना करते हुए बस्तर को नई पहचान देने का आह्वान किया।

रायपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं। यहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष से की और कहा कि आदिवासी संस्कृति में ही छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य है जहाँ सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन विरासत के संरक्षण के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को बढ़ावा दे रही है। यह आयोजन आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति का सजीव प्रतिबिंब है।

लालबाग मैदान में जनजातीय कलाकारों और जनसमूह की ऐतिहासिक भागीदारी

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित शुभारंभ समारोह में हजारों आदिवासी कलाकारों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। राष्ट्रपति ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान और नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शासन के साथ-साथ समाज और माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराएँ आज भी जीवंत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समाज की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक सशक्त मंच है। इस आयोजन में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों का पंजीयन उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।

माओवादी हिंसा से बाहर निकलता बस्तर, विकास की ओर तेज कदम

राष्ट्रपति ने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं और लोकतंत्र के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। वर्षों से बंद पड़े विद्यालय फिर से खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़क, पुल-पुलिया बन रही हैं और विकास की रोशनी गाँव-गाँव तक पहुँच रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की निर्णायक कार्रवाई और राज्य सरकार के प्रयासों से भय और असुरक्षा का माहौल समाप्त हो रहा है। बस्तर में अब शांति, भरोसा और विकास का नया सूर्योदय हो रहा है।

बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव: राज्यपाल रमेन डेका

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का महोत्सव है। लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर, परघौनी, धुरवा, मुरिया और लेजा नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

ढोकरा कला और जनजातीय शिल्प बस्तर की पहचान

राज्यपाल ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प देश-विदेश में लोकप्रिय है और यह जनजातीय शिल्पकारों की मेहनत, कौशल और संस्कृति का प्रतीक है। लोककला तभी जीवित रह सकती है जब कलाकार खुशहाल होंगे।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के लिए सम्मान और आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय जीवन, आस्था, भाषा, नृत्य-गीत, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है। इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

नया बस्तर: डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सलवाद के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में अब भरोसा और विकास ने जगह ले ली है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। जहाँ पहले गोलियों की आवाज गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराना लोकतंत्र की जीत है।

नियद नेल्ला नार और जनमन अभियान बने विकास के आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान ने आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है। पुनर्वास नीति के कारण मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक जीवन मिल रहा है।

वनोपज, पर्यटन और युवाओं की नई पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः शुरू हुई है और वन धन केंद्रों से वनोपज को बेहतर बाजार मिल रहा है। बस्तर का धुड़मारास गाँव संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम यह दिखाते हैं कि यहाँ के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला से पहचान बना रहे हैं।

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