
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले कई हफ्तों से जारी सियासी और छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। एक ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की कि सरकार 25 जुलाई को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बातचीत के लिए तैयार हो गई है, तो दूसरी ओर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद अपना 26 दिन लंबा अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से वह पीछे नहीं हटेगी।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन सरकार के साथ शनिवार को होने वाली बैठक में शामिल होगा। उनके मुताबिक, बातचीत के लिए किसी सरकारी कार्यालय की बजाय कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया जैसे निष्पक्ष स्थल का चयन उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था। उन्होंने कहा कि संगठन इस फैसले का स्वागत करता है और उम्मीद है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर ठोस रुख अपनाएगी।
24 जुलाई 2026 की रात देश के इतिहास में एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में दर्ज हो गई है। पिछले 26 दिनों से अस्पताल के बेड पर मौत से जूझ रहे प्रख्यात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का अनशन आखिरकार टूट गया। यह नाटकीय मोड़ तब आया जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह आधी रात के करीब अचानक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की मौजूदगी में नड्डा ने सरकार की ओर से एक ऐसा आश्वासन पत्र पढ़ा जिसने आंदोलन की दिशा बदल दी। वांगचुक ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी और देश में संभावित तनाव को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया।
Sonam Wangchuk Ends his Fast after 26-day Hunger Strike, but CJP's peaceful protest at Jantar Mantar will continue until Dharmendra Pradhan resigns.
Engineer, Educator, and Environmental Activist Sonam Wangchuk ends his fast after 26 days upon getting Assurance from the Modi… pic.twitter.com/9kmnYlftcR— Surya Reddy (@jsuryareddy) July 24, 2026
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सरकार ने पहली बार झुकते हुए माना कि 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण आश्वासनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज न करने पर सकारात्मक विचार कर रही है, जिन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया या 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च में हिस्सा लिया था। इसके अलावा, सरकार पहले ही संसद में पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर चर्चा के लिए सहमत हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला उन पीड़ित परिवारों को लेकर आया, जिनके बच्चों ने NEET घोटाले के अवसाद में आकर आत्महत्या कर ली थी-सरकार अब उन्हें उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।
#WATCH | Delhi: Saurav Das, Chief Spokesperson, Cockroach Janta Party, says, "... Tomorrow, a discussion has been called for, we are very happy that the government has agreed to our request that it be at a neutral venue. The Constitution Club of India has been chosen..." (23.07) pic.twitter.com/MoK1DgdgJ5
— ANI (@ANI) July 24, 2026
हालांकि वांगचुक के अनशन समाप्त करने से माहौल कुछ नरम जरूर हुआ है, लेकिन CJP ने साफ कहा है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। यानी, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद शुरू होने के बावजूद सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद अभी भी जस का तस बना हुआ है।
अब सबकी निगाहें 25 जुलाई को होने वाली सरकार और CJP की बैठक पर हैं। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब NEET-UG 2026 विवाद संसद से लेकर सड़कों तक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। यदि बैठक में परीक्षा सुधार, जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस सहमति बनती है, तो लंबे समय से जारी गतिरोध कम हो सकता है। लेकिन यदि बातचीत बेनतीजा रही, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
26 दिन बाद अनशन समाप्त होना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन इससे आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार और CJP के बीच होने वाली शनिवार की बातचीत तय करेगी कि NEET विवाद समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर देशभर में विरोध का नया दौर शुरू होगा। फिलहाल, पूरे देश की नजरें इसी अहम बैठक और उसके नतीजों पर टिकी हैं।
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