
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों पर जब छात्रों का आक्रोश परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर फूट पड़ा, तो किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह प्रदर्शन एक बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा विवाद में तब्दील हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने उतरी सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स (CRPF) की दंगा-रोधी शाखा 'रैपिड एक्शन फोर्स' (RAF) ने जब भीड़ पर पैलेट गन दाग दी, तो चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस एक्शन के बाद सुरक्षा बलों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने के गंभीर आरोप लगे, और मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक तीखी आलोचना शुरू हो गई। इस भारी दबाव और विवाद के बीच, अब स्वयं CRPF के डायरेक्टर जनरल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (जीपी सिंह) ने सामने आकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरे सुरक्षा महकमे में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने अपने जवानों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि वे बिना किसी खौफ के अपना काम करें, उनके हर एक्शन की जवाबदेही शीर्ष नेतृत्व की होगी।
हाल ही में राजधानी में प्रदर्शन के दौरान RAF ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोप लगे और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई। इसी विवाद के बीच DG ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशनल बटालियन हो या कानून-व्यवस्था संभालने वाली यूनिट, ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों की जिम्मेदारी वह खुद उठाएंगे। उनका संदेश स्पष्ट था-जवान कानून के दायरे में रहते हुए बिना भय के कार्रवाई करें।
अपने संबोधन में DG सिंह ने कहा कि CRPF के प्रत्येक जवान को अपने कर्तव्य का पालन पूरे आत्मविश्वास से करना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी ऑपरेशन के बाद जवाबदेही तय करने की नौबत आती है, तो सबसे पहले वह स्वयं आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के लिए कई बार हालात बेहद चुनौतीपूर्ण होते हैं, जहां कुछ ही सेकंड में निर्णय लेना पड़ता है। ऐसे समय में जवानों का मनोबल कमजोर नहीं होना चाहिए।
Delhi: CRPF Director General Gyanendra Pratap Singh attends the Grand Investiture Ceremony of the CRPF.
He says, "...I want to assure all of you that whether it is our operational battalions or our law and order units, whatever decisions you take and whatever actions you take in… pic.twitter.com/DCW3y92s1F— IANS (@ians_india) July 29, 2026
हालांकि, चीफ ने जवानों को कवच तो दिया है, लेकिन साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच की बात भी कही है। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए डीजी ने साफ किया कि इस पूरी घटना की एक 'प्रोफेशनल पोस्ट-इवेंट असेसमेंट' (Professional Post-Event Assessment) यानी घटना के बाद पेशेवर समीक्षा की जाएगी। यह समीक्षा CRPF की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस उच्च-स्तरीय जांच में उन वास्तविक हालातों का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा, जिनमें जवानों को पैलेट गन चलाने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाएंगी कि क्या भीड़ वाकई इतनी हिंसक हो चुकी थी कि आत्मरक्षा में छर्रे दागने पड़े, या फिर तय नियमों का उल्लंघन किया गया था।
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रैपिड एक्शन फोर्स, CRPF की विशेष इकाई है, जिसे दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील कानून-व्यवस्था की स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। देश में बड़े विरोध-प्रदर्शनों, सांप्रदायिक तनाव और हिंसक हालात के दौरान सबसे पहले RAF को तैनात किया जाता है। ऐसे अभियानों में जवानों को कई बार बेहद कम समय में कठिन फैसले लेने पड़ते हैं, जहां एक छोटी चूक भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
CRPF भारत का वह सबसे भरोसेमंद आंतरिक सुरक्षा बल है, जो अक्सर ऐसी जगहों पर तैनात होता है जहां फैसले लेने के लिए महज कुछ सेकंड का वक्त होता है और गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। यह बल पूर्वोत्तर में उग्रवादियों से लेकर मध्य भारत के जंगलों में माओवादियों से लोहा ले रहा है। इसकी विशेष विंग 'CoBRA' (कमांडो बटालियंस फ़ॉर रिज़ॉल्यूट एक्शन) ने जंगल वॉरफेयर में उग्रवादियों की कमर तोड़ कर रख दी है।
इस बल का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतने ही इसके ऑपरेशन विवादों से घिरे रहे हैं। नवंबर 2024 में मणिपुर के जिरीबाम ज़िले में असम सीमा के पास हुई एक मुठभेड़ आज भी रहस्य और विवाद के घेरे में है, जहां CRPF ने एक गांव पर हमला करने वाले 10 संदिग्ध कुकी विद्रोहियों को मार गिराया था। उस वक्त कुकी समुदाय ने दावा किया था कि मारे गए लोग महज "ग्राम स्वयंसेवक" थे, जबकि पुलिस ने उन्हें अत्याधुनिक हथियारों से लैस विद्रोही करार दिया था। दिल्ली के इस नए पैलेट गन विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आंतरिक सुरक्षा की राह में जवानों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल और सस्पेंस भरा होता है।
CRPF देश का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। यह राज्य पुलिस के साथ मिलकर चुनाव ड्यूटी, दंगा नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा, नक्सल विरोधी अभियान और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाती है। पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद से मुकाबला हो या माओवादी इलाकों में अभियान, CRPF लगातार अग्रिम मोर्चे पर रही है। इसकी CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) यूनिट जंगल और गुरिल्ला युद्धक अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाती है।
DG ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का बयान जवानों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि पैलेट गन विवाद की निष्पक्ष समीक्षा होगी। अब यह रिपोर्ट तय करेगी कि RAF की कार्रवाई पूरी तरह तय नियमों के अनुरूप थी या भविष्य में भीड़ नियंत्रण की रणनीति में बदलाव की जरूरत होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस समीक्षा के निष्कर्ष सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था से जुड़े अभियानों के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
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