गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में अलर्ट क्यों? मेट्रो-बाजारों में लगे आतंकी पोस्टर-खतरे का सायरन?

Published : Jan 20, 2026, 02:59 PM IST

EXPLAINED | Delhi High Alert: गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में खालिस्तानी और जिहादी आतंकियों के पोस्टर क्यों लगाए गए? क्या राजधानी निशाने पर थी? Arsh Dalla जैसे नामों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद क्यों उड़ा दी?

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Republic Day Security Alert in Delhi: 77वें गणतंत्र दिवस से ठीक पहले दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी बढ़ा दी है। मेट्रो स्टेशन, बाजार, भीड़भाड़ वाले इलाके और सार्वजनिक स्थानों पर खालिस्तान समर्थक और जिहादी आतंकियों के ‘मोस्ट वॉन्टेड’ पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के जरिए न सिर्फ सुरक्षा बलों को अलर्ट किया गया है, बल्कि आम लोगों को भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब खुफिया एजेंसियों को सीमा पार बैठे आतंकियों और उनके स्लीपर सेल्स को लेकर इनपुट मिले हैं। आख़िर दिल्ली को इतना बड़ा खतरा किससे है?

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सबसे वॉन्टेड लिस्ट में अर्श डाला सबसे ऊपर क्यों है?

इन पोस्टरों में सबसे ऊपर नाम है खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला का। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्श डाला अब एक ऐसे आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क का नेतृत्व कर रहा है, जो विदेश से भारत में हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहा है। बताया जाता है कि जून 2023 में कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद अर्श डाला ने संगठन की कमान संभाली। इसके बाद से उस पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए टारगेट किलिंग और साजिशों के आरोप लगे हैं।

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दिल्ली में पहले भी हो चुकी है टारगेट किलिंग?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, 2022 में दिल्ली में एक हिंदू युवक की हत्या अर्श डाला के नेटवर्क से जुड़ी मानी जाती है। पीड़ित को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उसके शरीर पर भगवान शिव और त्रिशूल के टैटू थे। यह घटना सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि समाज में डर और तनाव फैलाने की कोशिश मानी गई।

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विदेश में बैठे खालिस्तानी ऑपरेटिव्स से कितना खतरा?

  • पोस्टरों में अर्श डाला के साथ-साथ रंजीत सिंह नीता और परमजीत सिंह पम्मा जैसे नाम भी शामिल हैं।
  • रंजीत सिंह नीता पर हथियारों की तस्करी और सीमा पार आतंक फैलाने के आरोप हैं।
  • वहीं, पम्मा पर आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने का शक है।
  • दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां इसे ‘के-टेरर’ नेटवर्क मान रही हैं, जो विदेश से फंडिंग लेकर भारत में अशांति फैलाना चाहता है।
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जिहादी नेटवर्क पर भी क्यों है कड़ी नजर?

खालिस्तान समर्थकों के साथ-साथ जिहादी मॉड्यूल्स पर भी नजर रखी जा रही है। वॉन्टेड लिस्ट में शरजील अख्तर, मोहम्मद रेहान और AQIS से जुड़ा मोहम्मद अबू सुफियान जैसे नाम शामिल हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार, अबू सुफियान ने पाकिस्तान और नेपाल में ट्रेनिंग ली और भारत लौटकर स्लीपर सेल तैयार करने में लगा रहा। माना जा रहा है कि वह फिलहाल अफगानिस्तान या PoK में छिपा है।

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क्या दिल्ली में कोई बड़ी साजिश नाकाम करने की तैयारी है?

सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि गणतंत्र दिवस जैसे बड़े राष्ट्रीय आयोजन को निशाना बनाने की कोशिश हो सकती है। इसी वजह से CCTV निगरानी, पेट्रोलिंग, इनपुट-बेस्ड एक्शन और पब्लिक अलर्ट को तेज कर दिया गया है।

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आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, व्यक्ति या वस्तु की सूचना तुरंत दें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहें और अफवाहों से बचें। 

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क्या खतरा टल गया है या अभी बाकी है?

दिल्ली में गणतंत्र दिवस से पहले लगाया गया हाई अलर्ट इस बात का संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहतीं। पोस्टरों से लेकर कड़ी निगरानी तक, मकसद सिर्फ एक है-राष्ट्रीय पर्व को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाना।

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