
कोलकाता/नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐसा नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसने पूरे उत्तर और पूर्वी भारत के यात्रियों के होश उड़ा दिए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा की, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। अब देश की राजधानी दिल्ली से सिलीगुड़ी (न्यू जलपाईगुड़ी) का सफ़र दिनों या घंटों का नहीं, बल्कि पलक झपकते ही पूरा होने वाला है। रेल मंत्री के इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के एलान के बाद से ही सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है।
#WATCH | West Bengal: Union Minister Ashwini Vaishnaw travelled in Kolkata Metro today.
He says, "We are planning about 60 new generation trains for Kolkata Metro in coming 4-5 years. These trains will be inducted and Kolkata Metro Rail will get a totally new generation of… pic.twitter.com/G8HubTmbr3— ANI (@ANI) June 6, 2026
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे रोमांचक और चौंकाने वाला पहलू इसकी रफ़्तार और रूट है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ़ किया कि यह प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर केवल दिल्ली और सिलीगुड़ी को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार के सबसे प्रमुख शहरों को भी अपने साथ समेटेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान: "पश्चिम बंगाल में बहुत जल्द बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट दस्तक देने जा रहा है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर लखनऊ, वाराणसी और पटना के रास्ते सीधे सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी बुलेट ट्रेन से यह लंबी यात्रा केवल छह घंटे में पूरी हो जाएगी।" इस रूट के सामने आने के बाद से उन करोड़ों यात्रियों में भारी उत्साह है, जिन्हें दिल्ली से बिहार या बंगाल जाने के लिए ट्रेनों में 15 से 24 घंटे का समय बिताना पड़ता था।
✅ Big Boost for West Bengal's Infrastructure
Union Railways & IT Minister Shri @AshwiniVaishnaw met West Bengal CM Shri Suvendu Adhikari in Kolkata today to fast-track pending railway & metro projects.
Key stalled initiatives expected to get new momentum. Development first!…— आनंद गुप्ता (@aanandsg) June 6, 2026
रेल मंत्री ने केवल नई ट्रेन का एलान ही नहीं किया, बल्कि आंकड़ों की ऐसी बाजीगरी पेश की जिसने विरोधियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने यूपीए (UPA) सरकार और मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार के बजट की तुलना करते हुए रेलवे फंड में हुई भारी बढ़ोतरी का खुलासा किया।
वैष्णव ने बताया कि जहां पिछली यूपीए सरकार के समय पश्चिम बंगाल को रेलवे के विकास के लिए केवल ₹4,000 करोड़ मिलते थे, वहीं आज पीएम मोदी के नेतृत्व में यह बजट लगभग साढ़े तीन गुना बढ़कर ₹14,205 करोड़ हो चुका है। हालांकि, इस भारी-भरकम फंड के बावजूद काम की धीमी रफ़्तार के पीछे के सस्पेंस से भी उन्होंने पर्दा उठाया। मंत्री ने पिछली राज्य सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट सिर्फ़ इसलिए लटके रहे क्योंकि राज्य सरकार ने ज़रूरी प्रशासनिक मंजूरियां नहीं दीं, जिसके कारण कुछ मामले तो अदालत तक भी पहुंच गए।
🔴 #BreakingNews | Rail Minister @AshwiniVaishnaw announces bullet train project for Bengal
▪️Bullet train to connect national capital Delhi with Siliguri
▪️Travel time to be reduced to six hours pic.twitter.com/2shz7msHPK— Indrajit Kundu | ইন্দ্রজিৎ (@iindrojit) June 6, 2026
बुलेट ट्रेन के अलावा रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो को लेकर भी एक बड़ा सरप्राइज दिया। उन्होंने पिछली विपक्षी सरकारों के 42 साल के काम की तुलना मोदी सरकार के पिछले कुछ वर्षों के काम से की। वैष्णव के मुताबिक, जहां विपक्ष के 42 वर्षों के शासन में केवल 28 किलोमीटर मेट्रो लाइन का काम पूरा हुआ था, वहीं मोदी सरकार के तहत अकेले कोलकाता में 45 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन का काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो चुका है। सस्पेंस को और आगे बढ़ाते हुए उन्होंने घोषणा की कि आने वाले पांच वर्षों के भीतर कोलकाता मेट्रो के नेटवर्क में 60 नई पीढ़ी की अल्ट्रा-मॉडर्न मेट्रो रेक (ट्रेन के डिब्बे) शामिल की जाएंगी, जो शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदल देंगी।
#WATCH कोलकाता, पश्चिम बंगाल: कोलकाता मेट्रो में यात्रा करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "अगले 5 वर्षों में कोलकाता मेट्रो में नई पीढ़ी की 60 नई ट्रेनें शामिल की जाएंगी..." pic.twitter.com/gh5jQT5Jsg
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 6, 2026
रेलवे के इस नए मास्टरप्लान में न केवल यात्रियों बल्कि माल ढुलाई (Freight) के लिए भी एक गुप्त कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए अब सीधे पश्चिम बंगाल का डंकुनी, गुजरात के सूरत शहर से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
इस विशालकाय विकास कार्य को ज़मीन पर उतारने के लिए रेल मंत्रालय ने एक अनोखी रणनीति अपनाई है। रेल मंत्री ने बताया कि राज्य के सभी विधायकों से सीधे फोन पर संपर्क साधा गया है। उनसे उनके अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की ज़रूरी और अटकी हुई रेलवे परियोजनाओं के बारे में सीधे सुझाव और फीडबैक मांगा गया है। रेलवे का विद्युतीकरण (Electrification) पहले ही पूरा हो चुका है, और अब देखना यह है कि यह 'बुलेट रफ़्तार' योजना बंगाल और उत्तर भारत की राजनीति और इंफ्रास्ट्रक्चर को किस नए मुकाम पर लेकर जाती है।
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