
NRI Couple Cyber Fraud: आज के डिजिटल दौर में ठगों ने अपराध करने के तरीके भी उतने ही हाई-टेक बना लिए हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम ऐसा ही एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिसमें न हथकड़ी होती है, न पुलिस स्टेशन-फिर भी शिकार पूरी तरह डर और दबाव में आ जाता है। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग NRI दंपती के साथ यही हुआ, जहां ठगों ने खुद को पुलिस, जांच एजेंसी और कोर्ट बताकर 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली। यह मामला इसलिए भी डरावना है क्योंकि इसमें न कोई लिंक क्लिक कराया गया, न OTP मांगा गया-सिर्फ डर, भरोसा और कानून के नाम पर खेल खेला गया।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग फोन या वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। पीड़ित को कहा जाता है कि वह किसी मनी लॉन्ड्रिंग या सिम कार्ड फ्रॉड केस में फंस चुका है और अब उसे “डिजिटल निगरानी” में रखा जा रहा है। मतलब-फोन चालू रखना होगा, वीडियो कॉल पर रहना होगा और किसी से बात नहीं करनी है।
दिसंबर में 77 साल की महिला को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उनके नाम का सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है। डर यहीं से शुरू हुआ। इसके बाद वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस अधिकारी, नकली जांच अधिकारी और यहां तक कि कोर्ट जैसी सेटिंग दिखाई गई। महिला और उनके पति को लगा कि मामला सच में गंभीर है और अगर बात बाहर गई तो गिरफ्तारी तय है।
ठगों ने कहा कि जांच के दौरान पैसे “सुरक्षित रखने” के लिए उन्हें RBI-अनिवार्य अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा। डर के माहौल में दंपती ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट, सेविंग और निवेश से एक-एक कर पैसे ट्रांसफर कर दिए। कुल रकम-14 करोड़ 80 लाख रुपये से ज्यादा।
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि यह कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा साइबर नेटवर्क था। इसमें शामिल थे-
इनका काम था म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराना, यानी ऐसे बैंक खाते जिनमें ठगी का पैसा घुमाया जाता है।
जांच में पता चला कि असली मास्टरमाइंड भारत में नहीं, बल्कि कंबोडिया और नेपाल से ऑपरेशन चला रहे थे। भारत में पकड़े गए लोग सिर्फ पैसा ट्रांसफर कराने और अकाउंट मैनेज करने का काम कर रहे थे।
10 जनवरी को ई-पुलिस शिकायत दर्ज हुई। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने बैंक ट्रांजैक्शन ट्रैक किए, मोबाइल कॉल डेटा खंगाला और टेक्निकल सर्विलांस किया। तीन राज्यों में छापेमारी कर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और कई मोबाइल व चेकबुक बरामद की गईं।
सबसे बड़ा सबक यह है कि कोई भी पुलिस या एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती, RBI कभी पैसा ट्रांसफर नहीं करवाता और अगर डर दिखाकर पैसे मांगे जाएं तो तुरंत सतर्क हो जाएं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम आज हर उम्र के लोगों के लिए खतरा है, लेकिन बुजुर्ग और NRI सबसे आसान निशाना बन रहे हैं।
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