
Iran-US Tension: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम को साफ तौर पर बता दिया है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो वह तेज, सीमित और निर्णायक होना चाहिए। मतलब, ट्रंप किसी ऐसे युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, जो रूस-यूक्रेन की तरह महीनों या कई सालों तक खिंचे। कुल मिलाकर ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा है कि कोई भी मिलिट्री एक्शन ऐसा होना चाहिए, जो ईरान की सरकार को हिला दे, ना कि एक लंबा संघर्ष बन जाए। हालांकि, अब सवाल ये उठता है कि क्या अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करना वेनेजुएला की तरह आसान होगा?
ट्रंप भले ही सार्वजनिक रूप से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए ये कहते रहे हैं कि आप लोग युद्ध करें, संस्थानों पर कब्जा करें, मदद आ रही है। लेकिन हकीकत ये है कि अमेरिका की रक्षा और खुफिया एजेंसियां अब तक भी यह भरोसा नहीं दे पाई हैं कि अमेरिकी हमला ईरान के नेतृत्व को गिरा देगा, या फिर इससे पूरे क्षेत्र में एक बड़ा युद्ध टल जाएगा। इसी अनिश्चितता की वजह से व्हाइट हाउस अब लिमिटेड मिलिट्री एक्शन के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
इस महीने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने वाले अमेरिकी ऑपरेशन की तुलना बार-बार की जा रही है। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान वेनेजुएला नहीं है। दरअसल, ईरान की सैन्य ताकत, क्षेत्रीय प्रभाव और अंदरूनी हालात किसी भी “जीत” को बेहद मुश्किल बना सकते हैं और ये बात अमेरिका अच्छी तरह जानता है।
वेनेजुएला में हुए ऑपरेशन में महीनों की खुफिया तैयारी, जबरदस्त हवाई ताकत और वेनेजुएला के एयर डिफेंस की नाकामी ने अमेरिका को आधे घंटे में सफलता दिलाई। लेकिन ईरान में हालात वेनेजुएला से बिल्कुल जुदा हैं। इनमें ईरान का मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क सिस्टम सबसे खास है। बीते एक साल में ईरान ने अपने डिफेंस सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास अब रूसी S-300 और S-400 सिस्टम, चीन की HQ-9B मिसाइलें, स्वदेशी बावर-373 प्लेटफॉर्म का एक लेयर्ड और मोबाइल एयर डिफेंस नेटवर्क है। HQ-9B की रेंज: लगभग 300 किमी और स्पीड Mach 4+ है।
ईरान ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर विदेशी सपोर्ट पर निर्भरता बेहद कम कर दी है, जबकि वेनेजुएला की ये सबसे बड़ी कमजोरी थी। इसलिए ईरान पर वेनेजुएला-जैसे हमले का मतलब होगा अमेरिकी विमानों का नुकसान, नागरिक ठिकानों पर गलत हमले का खतरा और क्षेत्र में तेजी से बढ़ता तनाव।
अगर ट्रंप हवाई या मिसाइल हमले की मंजूरी देते भी हैं, तो अमेरिका के सामने बड़ी चुनौती है। फिलहाल मिडिल ईस्ट में कोई अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद नहीं है। USS Abraham Lincoln को तैनात किया गया है, लेकिन उसके पहुंचने में लगभग एक हफ्ता लगेगा। इसके अलावा किसी भी हमले के लिए अमेरिका को कतर, बहरीन, इराक, UAE और सऊदी अरब के एयरबेस पर निर्भर रहना होगा और ये सभी देश ईरानी मिसाइलों की जद में हैं।
ईरान के पास अब भी करीब 2000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, इनमें से कई पहाड़ों में छिपाकर तैनात की गई हैं। माना जा रहा है कि एक बड़े हमले से अमेरिका और इजराइल की रक्षा प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ सकता है। इससे सैन्य ठिकानों, जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को गंभीर खतरा हो सकता है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघद्दाम ने कहा कि ट्रंप ने तेहरान को भरोसा दिलाया है कि अमेरिका का ईरान पर हमला करने का इरादा नहीं है। उन्होंने संयम बरतने की अपील की है। राजदूत के मुताबिक, ईरान हाई अलर्ट पर है और एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद किया गया है। वो किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।
कुल मिलाकर ईरान में ट्रंप द्वारा सुझाई गई “मदद” जितनी आसान दिखती है, उससे कहीं ज्यादा कठिन और खतरनाक हो सकती है।
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