नई दिल्ली: पूर्व चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने उमर खालिद को जमानत न दिए जाने के आदेश पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि जब तक जुर्म साबित नहीं हो जाता, हर कोई बेगुनाह है। उमर लगभग पांच साल से विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर बाद में वह निर्दोष साबित होते हैं, तो उनके खोए हुए समय का जवाब कौन देगा? उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई और वजह न हो तो जमानत देना ही नियम है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार में तेजी से सुनवाई का अधिकार भी शामिल है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने ये बातें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF 2026) में वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी के साथ बातचीत के दौरान कहीं।
एक्टिविस्ट उमर खालिद पिछले लगभग पांच सालों से फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इस घटना में 53 लोगों की मौत हुई थी। उमर खालिद को आखिरी बार पिछले दिसंबर में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए जमानत मिली थी।
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