Earthquake ALERT: भूकंप मलबे में फंसने के बाद चिल्लाना क्यों है खतरनाक? जानिए बचने के उपाय

Published : Jun 25, 2026, 10:44 AM IST
Earthquake Survival Tips

सार

Earthquake Survival Tips: भूकंप में मलबे के नीचे फंस जाएं तो लगातार चिल्लाना नुकसान पहुंचा सकता है। जानिए यह कितना खतरनाक और रेस्क्यू एक्सपर्ट्स के बताए जरूरी सेफ्टी टिप्स।

Earthquake Emergency Guide: वेनेजुएला में आए भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचाई है। पहले 7.2 और फिर कुछ ही सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता के भूकंप से कई बिल्डिंग्स ढह गईं और सैकड़ों लोग मलबे में फंस गए। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) का अनुमान तो इतना डरावना है कि यहां 1 लाख से ज्यादा लोगों की जान जाने की 30% आशंका जताई गई है। कई इमारतें ढह चुकी हैं और 500 से ज्यादा बचावकर्मी मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। ऐसे हादसों में अक्सर लोग सोचते हैं कि जोर-जोर से चिल्लाने से मदद जल्दी मिल जाएगी, लेकिन रेस्क्यू एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई मामलों में यही कोशिश आपकी मुश्किल बढ़ा सकती है। आइए जानते हैं भूकंप आने के बाद मलबे में फंसने पर चिल्लाना क्यों खतरनाक है और अपनी जान बचाने का सही तरीका क्या है...

मलबे में फंसने के बाद चिल्लाना क्यों है बड़ा खतरा?

1. जहरीली धूल का फेफड़ों में जाना

किसी इमारत के मलबे में फंसने के बाद घबराहट में चीखना-चिल्लाना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन साइंस और रेस्क्यू एक्सपर्ट्स इसके पीछे ये 3 बड़े नुकसान बताते हैं. पहला जहरीली धूल का फेफड़ों में जाना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बिल्डिंग ढहने से हवा में कंक्रीट, सीमेंट और ईंटों के बारीक कणों का भारी गुबार (धूल) बन जाता है। जब आप चिल्लाने के लिए लंबा सांस खींचते हैं, तो यह जहरीली धूल सीधे आपके फेफड़ों में चली जाती है, जिससे दम घुटने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

2. ऑक्सीजन की बर्बादी

मलबे के नीचे हवा (ऑक्सीजन) की मात्रा पहले से ही बहुत सीमित होती है। चिल्लाने और पैनिक करने से आपका शरीर ज्यादा ऑक्सीजन खर्च करने लगता है, जिससे वहां बची हुई हवा बहुत जल्दी खत्म हो सकती है।

3. गला बैठना और एनर्जी खत्म होना

लगातार चीखने से कुछ ही मिनटों में गला पूरी तरह बैठ जाता है और शरीर की ताकत खत्म हो जाती है। जब सच में कोई रेस्क्यू टीम आपके करीब आएगी, तब तक आप आवाज देने की स्थिति में ही नहीं बचेंगे।

तो फिर क्या करें?

मुंह और नाक को ढकें

चिल्लाने के बजाय खुद को सुरक्षित रखने और रेस्क्यू टीम तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक्सपर्ट्स तीन तरीके अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले अपने पास मौजूद किसी कपड़े, रुमाल या शर्ट के हिस्से से अपने मुंह और नाक को अच्छे से ढक लें ताकि फेफड़ों में धूल न जाए।

टैपिंग का तरीका अपनाएं

चिल्लाने के बजाय अपने हाथ के पास पड़े किसी पत्थर या लोहे के टुकड़े से वहां मौजूद किसी पाइप या कंक्रीट के हिस्से पर बार-बार मारें यानी टैप करें। धातु या कंक्रीट पर चोट करने की आवाज मलबे को चीरकर बहुत दूर तक जाती है और रेस्क्यू टीम के खोजी उपकरणों में तुरंत पकड़ में आ जाती है।

शांति से सुनें

बीच-बीच में थोड़ा रुककर बाहर की आवाजें सुनने की कोशिश करें। वेनेजुएला के चाकाओ शहर में इसी तरह सूझबूझ से अब तक 18 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

 

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