
वायरल न्यूजः ऑफिस में हर तरह के लोग होते हैं. कुछ लोग अपना काम फटाफट खत्म करके थोड़ा रिलैक्स करते हैं, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जो ऑफिस टाइमिंग खत्म होने के बाद भी लैपटॉप पर लगे रहते हैं. कई कंपनियों में 8 या 9 घंटे की शिफ्ट होने के बावजूद कर्मचारी देर तक काम करते हैं. ऐसे में स्कूल की घंटी बजने की तरह ठीक 5 बजे उठकर घर जाने वाले कर्मचारी ज्यादातर मैनेजरों को पसंद नहीं आते. फिर भी, जिनका काम खत्म हो गया है, वे निकलने से नहीं डरते. ऐसे ही एक मामले में, एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर बताया कि जब वह शाम 5 बजे अपनी शिफ्ट खत्म करके 5:10 पर ऑफिस से निकला, तो मैनेजर ने उसे रास्ते में ही रोक लिया. उसकी यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और इस पर खूब बहस हो रही है.
कर्मचारी ने बताया कि वह एक ऐसी कंपनी में काम करता था, जहां कोई भी 5 बजे से पहले घर जाने की हिम्मत नहीं करता था. वह बेकरी की दुकानें बनाने और डिजाइन करने वाली एक कंपनी में अकाउंट मैनेजर था. ऑफिशियल वर्किंग टाइम सुबह 8:30 से शाम 5 बजे तक था, लेकिन वह रोज सुबह 8:15 बजे तक ऑफिस पहुंच जाता था.
कर्मचारी ने बताया कि अपनी नई नौकरी के पहले हफ्ते में, वह शाम 5:05 या 5:10 बजे के आसपास ऑफिस से निकल जाता था. कुछ दिनों बाद, उसके मैनेजर ने उसे रोक लिया और जाने के समय पर सवाल किया. मैनेजर ने कहा, "आप ऐसे जल्दी नहीं जा सकते." जब कर्मचारी ने वजह पूछी, तो मैनेजर ने कहा, "आप बहुत जल्दी निकल रहे हैं, सब लोग इस बारे में बात कर रहे हैं." इस पर कर्मचारी ने जवाब दिया कि वह तो काम शुरू होने से 15 मिनट पहले आता है. लेकिन मैनेजर ने यह मानने से इनकार कर दिया और कहा, "आपको जल्दी आते हुए कोई नहीं देखता."
इसके बाद, ऑफिस का माहौल समझने के लिए कर्मचारी ने अपने सहकर्मियों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया. उसने देखा कि ज्यादातर लोग शाम 5:20 या 5:25 तक ऑफिस में ही रहते थे. ऐसा इसलिए नहीं था कि उनके पास काम बचा हो, बल्कि इसलिए कि कोई भी सबसे पहले निकलकर बॉस की नजरों में नहीं आना चाहता था.
कर्मचारी ने लिखा, “मैं लगभग 75 कर्मचारियों वाली कंपनी की बात कर रहा हूं, और ये सभी कर्मचारी एक-दूसरे को पहले न निकलने के लिए बंधक बनाकर रखते थे. मैंने 8 साल पहले वह कंपनी छोड़ दी थी. लेकिन यह मेरे करियर का सबसे खराब वर्क कल्चर था. मैं हमेशा इसे एक बुरे उदाहरण के तौर पर लोगों को बताता हूं. यह सरासर पागलपन था.”
यह पोस्ट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. कई लोगों ने वर्कप्लेस पर इस तरह के दबाव के अपने अनुभव शेयर किए. एक यूजर ने कमेंट किया, "मैं एक ऐसी कंपनी में काम करता था जहां 8-5 या 9-6 की शिफ्ट थी, लेकिन वे चाहते थे कि आप शिफ्ट शुरू होने से 16 मिनट पहले अपनी डेस्क पर हों. अगर आप एक मिनट भी लेट होते, तो आपको भरपाई के लिए एक घंटा अतिरिक्त काम करना पड़ता था. यानी अगर आप 8:01 पर आए, तो आपको शाम 6 बजे तक रुकना पड़ता था. लंच के लिए भी यही नियम था."
एक अन्य यूजर ने लिखा, "मैं जहां काम करता था, वहां कुछ कर्मचारी जल्दी चले जाते थे. जब उन पर दबाव डाला गया, तो उन्होंने बताया कि पहली नौकरी में पर्याप्त सैलरी नहीं मिलती, इसलिए उन्हें अपनी दूसरी नौकरी के लिए जाना पड़ता है." एक और यूजर ने इसे "एक बुरे सपने जैसा" बताया और कहा, “यह मुझे उस समय की याद दिलाता है जब मैं इसी तरह के जाल में फंसा था. मुझे खुशी है कि मैंने वह नौकरी छोड़ दी.”
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