India AI Summit: एआई एक्स्पो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से क्यों खाली कराया स्टॉल, पैवेलियन की बिजली भी काटी

Published : Feb 18, 2026, 03:59 PM ISTUpdated : Feb 18, 2026, 04:02 PM IST
Galgotias University controversy

सार

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल खाली कराया गया। वायरल वीडियो में दिखाए गए रोबोटिक डॉग को अपनी खोज बताने पर विवाद हुआ। टेक एक्सपर्ट्स ने इसे चीन की कंपनी Unitree का Go2 मॉडल बताया, जिस पर यूनिवर्सिटी ने सफाई दी।

India AI Summit: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टाफ और अधिकारियों ने अपना स्टॉल खाली कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से यूनिवर्सिटी को स्टॉल हटाने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली भी काट दी गई है।

चाइनीज रोबोटिक डॉग को अपनी खोज बताने पर विवाद

यह पूरा मामला एक वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह एक रोबोटिक डॉग को ‘ओरियन’ नाम से पेश करते हुए कह रही थीं कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है।

रोबोटिक डॉग के साथ ड्रोन को लेकर भी विवाद

वीडियो सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोटिक डॉग दरअसल चीनी कंपनी Unitree का ‘Go2’ मॉडल है। यह मॉडल बाजार में लगभग 2 से 3 लाख रुपए में उपलब्ध है। रोबोटिक डॉग के साथ-साथ एक ड्रोन को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी कैंपस में दिखाए गए ड्रोन को शुरुआत से तैयार किया गया प्रोजेक्ट बताया गया। हालांकि, कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह लगभग 40 हजार रुपए की कीमत वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल है।

यूनिवर्सिटी का बयान: हमने रोबोटिक डॉग नहीं बनाया

वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई दी। यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह लगातार अपने कैंपस में नई और बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश करती रही है। उनका कहना है कि जब स्टूडेंट्स नई तकनीक को देखते और समझते हैं, तभी उनकी सोच डेवलप होती है और नए इनोवेटर तैयार होते हैं। यूनिवर्सिटी ने स्वीकार किया कि रोबोटिक डॉग हाल ही में यूनिट्री से लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल डेमोंस्ट्रेशन के लिए रखी गई मशीन नहीं है, बल्कि यह एक ‘चलता-फिरता क्लासरूम’ है। छात्र इस पर प्रयोग कर रहे हैं, इसकी क्षमताओं को समझ रहे हैं और इससे सीख रहे हैं।

हमने कभी इसे अपना आविष्कार नहीं बताया

यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उसने यह रोबोटिक डॉग खुद नहीं बनाया है और न ही ऐसा कोई दावा किया है। हालांकि, उनका कहना है कि वे ऐसे छात्रों को तैयार कर रहे हैं, जो भविष्य में भारत में इसी तरह की टेक्नोलॉजी डिजाइन और विकसित कर सकें। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इनोवेशन और सीखने की कोई लिमिट नहीं होनी चाहिए। वे दुनियाभर की बेहतरीन तकनीक कैंपस में लाते रहेंगे, ताकि छात्र उनकी स्टडी कर सकें, उन्हें चुनौती दे सकें और उनमें सुधार करके वर्ल्ड क्लास सॉल्यूशन तैयार कर सकें।

प्रोफेसर नेहा सिंह का रिस्पांस

इस पूरे मामले में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने कहा कि यह विवाद शायद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि बातें साफ तौर पर प्रस्तुत नहीं की गईं। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी खुद लेते हुए कहा कि यह सब बहुत जोश और उत्साह में जल्दी-जल्दी हो गया। सरकार द्वारा एक्सपो एरिया खाली कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इतना ही कहा कि फिलहाल वे और उनकी टीम वहां मौजूद हैं।

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