
नई दिल्ली : आज की युवा पीढ़ी, यानी Gen Z, पैसा बनाने के मामले में तो बहुत आगे है, लेकिन जब अपनी सुरक्षा की बात आती है तो वे पीछे रह जाते हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 51% Gen Z युवा म्यूचुअल फंड और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में जमकर पैसा लगा रहे हैं, लेकिन वे अभी भी अपने माता-पिता के इंश्योरेंस पर ही निर्भर हैं। इस वजह से वे खुद का सुरक्षा कवच बनाने में देरी कर रहे हैं।
बजाज कैपिटल की इस रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इस पीढ़ी के 29% युवा जानकारी के लिए फाइनेंशियल ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं और 26% इंफ्लुएंसर्स को फॉलो करते हैं। हालांकि, उनकी यह खोज सिर्फ रिसर्च तक ही सीमित रह जाती है। जानकारी होने के बावजूद असल में पॉलिसी खरीदने वालों की संख्या बहुत कम है।
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। भले ही ये युवा एक्टिव इन्वेस्टर हैं, लेकिन उनकी फाइनेंशियल नींव काफी कमजोर है। करीब 65% Gen Z युवा किसी भी एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से अपनी सारी जमा-पूंजी गंवा सकते हैं।
वहीं, बाकी 35% को लगता है कि वे अपने माता-पिता या कंपनी की पॉलिसी से पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन असल में वे अंडर-प्रोटेक्टेड हैं, यानी उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली हुई है। यह वो वर्ग है जो अपने बढ़ते इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की वजह से कागजों पर तो अमीर दिखता है, लेकिन सेहत से जुड़ी एक भी बड़ी घटना उनकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग को पटरी से उतार सकती है।
बजाज कैपिटल इंश्योरेंस ब्रोकिंग लिमिटेड के CEO, वेंकटेश नायडू ने कहा, "डेटा से वो बात साफ हो गई है जिसका हमें अंदेशा था। भारत इंश्योरेंस तो ले रहा है, लेकिन जिस तेजी और पर्याप्तता की जरूरत है, वैसी नहीं। युवा बचत तो खूब कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्क नहीं हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, फिर भी इंश्योरेंस के फैसलों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। और सभी ग्रुप्स में, किसी असली संकट के समय सुरक्षा का खर्च उससे कहीं ज़्यादा होता है, जितना लोग अपनी पॉलिसी से कवर मानते हैं।"
रिपोर्ट में बताया गया है कि इंश्योरेंस को टालने की वजह यह नहीं है कि युवा इसे खारिज करते हैं, बल्कि उन्हें इसकी तत्काल जरूरत महसूस नहीं होती। म्यूचुअल फंड में उन्हें रिटर्न दिखता है और पैसे बढ़ने का एहसास होता है, लेकिन इंश्योरेंस का असली फायदा सिर्फ क्लेम के वक्त ही समझ आता है।
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