गाजियाबाद सुसाइड केस: 3 बहनों के मौत की वजह 2015 का वो खौफनाक 'राज' तो नहीं?

Published : Feb 08, 2026, 10:30 AM IST

Ghaziabad Three Sisters Suicide Case: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के बाद एक पुराना राज फिर उभरा है। क्या पिता की 2015 की लिव-इन पार्टनर की आत्महत्या और बेटियों की मौत के बीच कोई कनेक्शन है? पुलिस टाइमलाइन जोड़ रही है। 

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Ghaziabad Triple Suicide Mystery: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। नौवीं मंज़िल से कूदकर जान देने वाली निशिका, प्राची और पाखी की कहानी जितनी दिल दहला देने वाली है, उतनी ही रहस्यमयी भी। अब इस केस में एक ऐसा पुराना मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की जांच को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है—साल 2015 में पिता चेतन कुमार की लिव-इन पार्टनर की आत्महत्या।

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2015 का मामला फिर क्यों चर्चा में आया?

पुलिस के मुताबिक, चेतन कुमार की लिव-इन पार्टनर की 2015 में साहिबाबाद इलाके में एक फ्लैट की छत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उस वक्त इस केस को आत्महत्या मानकर बंद कर दिया गया था। अब जब तीन नाबालिग बहनों ने भी आत्महत्या की है, तो पुलिस उस पुराने केस को बैकग्राउंड के तौर पर फिर से देख रही है। डीसीपी ट्रांस-हिंडन निमिश पाटिल साफ कहते हैं कि फिलहाल 2015 के केस और बहनों की मौत के बीच कोई सीधा सबूत नहीं है, लेकिन परिवार की पूरी टाइमलाइन को समझना ज़रूरी है।

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तीन पत्नियां, 4 बेटियां और एक जटिल परिवार

जांच में सामने आया है कि चेतन कुमार की मौजूदा तीन पत्नियां हैं-सुजाता, हीना और टीना-और तीनों सगी बहनें हैं। सुजाता की बेटी निशिका थी, जबकि हीना की बेटियां प्राची और पाखी थीं। इनके अलावा टीना के भी एक बेटी है और सुजाता के एक बेटा है। चर्चा ये भी है कि चेतन ने एक मुस्लिम महिला से भी शादी की थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस जटिल पारिवारिक ढांचे का बच्चों की मानसिक स्थिति पर कोई असर पड़ा?

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सुसाइड नोट में पिता ही क्यों?

पुलिस को लड़कियों के कमरे से एक सुसाइड नोट और नौ पन्नों की एक पॉकेट डायरी मिली है। चौंकाने वाली बात यह है कि सुसाइड नोट में तीनों बहनों ने सिर्फ अपने पिता को संबोधित किया है, मां का कहीं ज़िक्र नहीं है। इससे यह सवाल उठता है कि बच्चों का भावनात्मक जुड़ाव किसके साथ ज़्यादा था और वे अंदर ही अंदर किस दबाव से गुजर रही थीं?

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मोबाइल फोन बना तनाव की वजह?

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पिता ने बेटियों के मोबाइल फोन छीन लिए थे। वजह बताई जा रही है-कोरियन ऐप्स, ऑनलाइन गेम्स और विदेशी दोस्तों से बातचीत। बाद में ये फोन बेच दिए गए। घटना वाली रात लड़कियों ने मां का फोन इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन वे अपने पसंदीदा ऐप्स तक नहीं पहुंच पाईं। क्या डिजिटल दुनिया से अचानक कट जाना उनकी बेचैनी को और बढ़ा गया?

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महिला आयोग ने क्या सवाल उठाए?

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह ने परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि शुरुआती जांच में ज़्यादा पढ़ाई का दबाव और माता-पिता की लापरवाही सामने आई है। आयोग ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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अभी इस प्रकरण में क्या कर रही गाजियाबाद पुलिस?

फिलहाल पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। साइबर टीम IMEI नंबर के जरिए बेचे गए फोन की ट्रैकिंग कर रही है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार है। असली सच इन रिपोर्ट्स के आने के बाद ही सामने आएगा। यह सिर्फ हालात का दबाव था, या बंद दरवाजों के पीछे कुछ ऐसा चल रहा था, जो अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है?

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