
Yogi Adityanath Model: यूरोप में प्रदर्शन के नाम पर हिंसक घटनाओं और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में तेजी देखी गई है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इटली सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। भारी तोड़फोड़ के बाद वहां की सरकार ने एक ऐसा तरीका अपनाया है, जिसकी चर्चा भारत में पहले से होती रही है। यह तरीका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस चर्चित मॉडल से प्रेरित है, जिसे उन्होंने उपद्रवियों पर लगाम कसने के लिए तैयार किया था。
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 20 अक्टूबर को कैबिनेट बैठक के बाद नए सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। इन प्रावधानों के तहत हिंसा करने वालों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी। इटली सरकार ने उसी तर्ज पर नुकसान की वसूली का खाका तैयार किया है, जैसा उत्तर प्रदेश में साल 2020 में लागू किया गया था。
नए आदेश के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पांच या अधिक लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान पत्थर, पटाखे या डंडे फेंकता है, तो उसे पांच साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही उन पर 20 हजार यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। चेहरा ढककर पहचान छिपाने या तोड़फोड़ करने पर सजा सख्त हो सकती है। सरकार के मुताबिक शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है, लेकिन हिंसा स्वीकार नहीं की जाएगी。
मेलोनी सरकार ने साफ किया है कि यदि कोई नाबालिग संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई उसके माता-पिता को करनी होगी। सार्वजनिक संपत्ति के मामले में प्रशासन भुगतान का आदेश जारी करेगा, जबकि निजी संपत्ति पर प्रभावित व्यक्ति अदालत से मुआवजा मांग सकेगा। युवाओं के लिए एहतियातन हिरासत की अवधि बढ़ाने और सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की योजना है。
मिलान में वीकेंड के दौरान हुई हिंसक झड़पों में लगभग 200 सुरक्षाकर्मी घायल हुए। व्यापारिक संगठनों के अनुमान के अनुसार संपत्तियों को करीब 10 लाख यूरो का नुकसान पहुंचा। शांति बनाए रखने के लिए साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जाएगी। उपद्रवियों की पहचान के लिए सरकार बायोमेट्रिक तकनीक और एआई का उपयोग करेगी。
इटली के इन कदमों की तुलना उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से हो रही है। यूपी में साल 2020 में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूलने के लिए कानून बनाया गया था। नुकसान का आकलन करने के लिए लखनऊ और मेरठ में क्लेम ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। इन ट्रिब्यूनल को आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने और उनके नाम-पते प्रदर्शित करने का अधिकार है।
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