
गांधीनगर। ‘सौराष्ट्रे सोमनाथं च…’ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की यह पंक्ति बताती है कि जब भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का वर्णन होता है, तो सबसे पहले सोमनाथ का नाम आता है। यह भारत की संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा में सोमनाथ के सर्वोच्च स्थान को दर्शाता है। सोमनाथ न केवल एक मंदिर है, बल्कि यह भारत की अविनाशी सांस्कृतिक चेतना और आत्मसम्मान का प्रतीक भी है।
पिछले दो दशकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर एक नए स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मंदिर के विकास, संरक्षण और वैश्विक पहचान को नई दिशा दी। इसके साथ ही सोमनाथ के समग्र विकास का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ।
वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी वर्ष महमूद गजनवी द्वारा वर्ष 1026 में किए गए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होंगे। इतने लंबे समय के बाद भी सोमनाथ मंदिर आज पूरे गौरव के साथ अडिग खड़ा है। साथ ही 2026 में ही सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे होने जा रहे हैं। 11 मई 1951 को मंदिर का पुनर्निर्माण पूर्ण हुआ था और इसे भक्तों के लिए खोला गया था।
इन ऐतिहासिक अवसरों को और विशेष बनाते हुए प्रधानमंत्री 11 जनवरी को सोमनाथ की यात्रा करेंगे और ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में भाग लेंगे। यह आयोजन भारत की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगा।
सोमनाथ मंदिर अपने शिखर पर 1,666 स्वर्ण कलशों और 14,200 ध्वजाओं के साथ तीन पीढ़ियों की अटूट श्रद्धा, साहस और कलात्मकता का प्रतीक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं।
2020 से 2024 के बीच औसतन 97 लाख श्रद्धालु प्रतिवर्ष सोमनाथ पहुंचे।
पिछले दो वर्षों में 13.77 लाख श्रद्धालुओं ने बिल्व पूजा में भाग लिया, जिनमें महाशिवरात्रि 2025 के दौरान 3.56 लाख भक्त शामिल रहे। आज ऑनलाइन बुकिंग और पोस्टल प्रसादी जैसी सुविधाओं के माध्यम से सोमनाथ की पवित्रता देश-विदेश के भक्तों तक पहुंच रही है।
सोमनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उत्सव और संस्कृति का भी प्रमुख स्थल है। पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक लोगों ने मंदिर परिसर में आयोजित लाइट एंड साउंड शो देखा। वर्ष 2024 में आयोजित वंदे सोमनाथ कला महोत्सव में 1,500 वर्ष पुरानी नृत्य परंपराओं का पुनर्जीवन हुआ, जिसने सोमनाथ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
सोमनाथ की यात्रा को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए कनेक्टिविटी में बड़े सुधार किए गए हैं। 828 करोड़ रुपये की लागत से बना जेतपुर-सोमनाथ फोर लेन हाईवे श्रद्धालुओं को एक्सप्रेसवे जैसी सुविधा देता है। साबरमती-वेरावल वंदे भारत एक्सप्रेस ने अहमदाबाद से सोमनाथ की यात्रा को तेज और आरामदायक बना दिया है।
वर्ष 2022 में पुनः शुरू हुए केशोद एयरपोर्ट और 2023 में उद्घाटित राजकोट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ तक पहुंच और भी सरल हो गई है।
वर्ष 2018 में ‘स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस’ का दर्जा पाने वाला सोमनाथ आज सस्टेनेबल डेवलपमेंट का आदर्श उदाहरण बन चुका है। मंदिर के फूलों से वर्मीकम्पोस्ट तैयार कर 1,700 बिल्व वृक्षों का संरक्षण किया जा रहा है।
मिशन लाइफ के तहत प्लास्टिक कचरे से प्रतिमाह 4,700 पेवर ब्लॉक्स बनाए जा रहे हैं। इससे 125 टन प्लास्टिक का वार्षिक रिसाइक्लिंग होगा और स्थानीय महिला स्वयं-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।
62 लाख रुपये की लागत से पुनर्स्थापित वर्षा जल कुएं और जलाशय हर माह 30 लाख लीटर पानी को शुद्ध करते हैं। 160 लाख रुपये के निवेश से स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स अब तक 20.53 करोड़ लीटर पानी को पुनः उपयोग योग्य बना चुके हैं। 72,000 वर्ग फीट में विकसित मियावाकी वन समुद्री हवाओं से रक्षा करता है और सालाना 93,000 किलोग्राम CO₂ अवशोषित करेगा।
अभिषेक का पवित्र जल नौ-स्तरीय शुद्धिकरण के बाद ‘सोम गंगाजल’ के रूप में मात्र 15 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है। दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख परिवार इसका लाभ ले चुके हैं।
गूगल पर भारतीयों द्वारा सबसे अधिक सर्च किए गए टॉप-10 स्थानों में सोमनाथ शामिल है। वर्ष 2025 में इसकी सोशल मीडिया इम्प्रेशन 1.37 अरब को पार कर गई। यह वैश्विक स्तर पर सोमनाथ की लोकप्रियता और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।
सोमनाथ मंदिर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, “यदि हजार वर्ष पहले खंडित हुआ सोमनाथ पुनः वैभव के साथ खड़ा हो सकता है, तो भारत भी अपनी प्राचीन समृद्धि पुनः प्राप्त कर सकता है।”
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