4613 करोड़ के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बदलेगी ग्वालियर-आगरा की किस्मत, जानिए पूरी डिटेल

Published : Feb 09, 2026, 04:51 PM IST

Gwalior Agra Greenfield Expressway: ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तहत चंबल नदी पर प्रस्तावित 300 मीटर लंबे हैंगिंग पुल के निर्माण में तकनीकी अड़चन सामने आई है। पाइल टेस्टिंग फेल होने के बाद लाइनर तकनीक अपनाने का फैसला लिया गया है।

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ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में क्या है नया अपडेट?

देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक बार फिर चर्चा में है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चंबल नदी पर प्रस्तावित करीब 300 मीटर लंबे हैंगिंग पुल के निर्माण से पहले एक बड़ी तकनीकी समस्या सामने आई है। पुल के पाइल निर्माण से पूर्व की गई टेस्टिंग असफल हो गई है, जिसके बाद निर्माण एजेंसी और विभागीय स्तर पर नए समाधान तलाशे जा रहे हैं।

यह पुल न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि एक्सप्रेसवे की निरंतरता और गति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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पाइल टेस्टिंग फेल, अब लाइनर तकनीक से होगा समाधान

परियोजना से जुड़ी निर्माण एजेंसी जीआर इंफ्रा कंपनी ने इस तकनीकी समस्या को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) से सहयोग मांगा है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि चंबल नदी के तल की मिट्टी कमजोर और धंसने वाली है, जिसके कारण पाइल टेस्टिंग सफल नहीं हो सकी।

इसके बाद कंपनी ने निर्णय लिया है कि पाइल निर्माण के दौरान लाइनर (धातु के खोल) का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक से मिट्टी के धंसकने और कटाव को रोका जा सकेगा, जिससे पिलर निर्माण अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी क्षेत्रों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल जोखिम को काफी हद तक कम करता है।

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चंबल नदी में पिलर निर्माण पर सख्त शर्त

इस हैंगिंग पुल को लेकर सबसे बड़ी चुनौती टेंडर की शर्तें हैं। शर्तों के अनुसार चंबल नदी के भीतर किसी भी प्रकार का पिलर निर्माण नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि पुल को हैंगिंग डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। यह छह लेन का पुल होगा और इसे तकनीकी रूप से अत्याधुनिक मानकों पर तैयार किया जाएगा।

निर्माण एजेंसी ने लक्ष्य रखा है कि सभी बाधाओं को दूर करते हुए एक वर्ष के भीतर पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाए। पुल के तैयार होने से एक्सप्रेसवे पर यातायात की रफ्तार और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

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दूरी और समय दोनों होंगे कम

ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के पूरा होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में 121 किलोमीटर लंबे ग्वालियर-आगरा हाईवे के मुकाबले यह एक्सप्रेसवे 88.40 किलोमीटर लंबा होगा। यानी दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 33 किलोमीटर कम हो जाएगी।

इसका सीधा असर यात्रा समय पर पड़ेगा। जहां अभी आगरा से ग्वालियर पहुंचने में ढाई से तीन घंटे तक का समय लगता है, वहीं एक्सप्रेसवे के जरिए यह सफर महज 1 से 1.30 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

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4613 करोड़ की परियोजना, विकास को मिलेगी रफ्तार

करीब 4613 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे मध्य भारत के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासकर आगरा, ग्वालियर, मुरैना और धौलपुर जैसे क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

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भू-अर्जन बना शुरुआती चुनौती

हालांकि परियोजना की शुरुआत से ही भू-अर्जन एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। इस एक्सप्रेसवे के लिए आगरा, राजस्थान के धौलपुर, मध्यप्रदेश के मुरैना और ग्वालियर जिलों में 502 हेक्टेयर से अधिक जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

मुरैना जिले में मुआवजा वितरण के बावजूद कई किसान अभी भी जमीन पर खेती कर रहे हैं, जिससे भौतिक कब्जे के दौरान विरोध की स्थिति बन रही है। वहीं धौलपुर में किसानों का आरोप है कि उन्हें जमीन के बदले पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, जिसके चलते असंतोष बना हुआ है।

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चुनौतियों के बीच आगे बढ़ती परियोजना

तकनीकी अड़चनें और भू-अर्जन से जुड़ी समस्याओं के बावजूद ग्वालियर-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को सरकार और संबंधित एजेंसियां एक रणनीतिक परियोजना के रूप में देख रही हैं। यदि निर्धारित समयसीमा में चंबल नदी पर हैंगिंग पुल का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग का उदाहरण बनेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास की तस्वीर भी बदल देगी।

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