15 दिनों में 12 मौतें, हरियाणा के इस गांव में फैली रहस्यमयी बीमारी से दहशत

Published : Feb 16, 2026, 12:58 PM IST

Palwal Mysterious Disease News: हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप। तेज बुखार और उल्टी के लक्षणों के बीच स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी। पानी के सैंपल में बैक्टीरिया और कम क्लोरीन की पुष्टि, दूषित पानी पर गहराया शक।

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पलवल के छायंसा गांव में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 15 दिनों में 12 मौतें, पानी पर गहराया शक

हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में इन दिनों सन्नाटा है। गलियों में सामान्य चहल-पहल की जगह डर और अनिश्चितता ने ले ली है। पिछले 15 दिनों में 12 लोगों की मौत ने पूरे गांव को दहला दिया है। मरने वालों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। अचानक बिगड़ती तबीयत और कुछ ही दिनों में मौत की खबरों ने ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक बीमारी की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है।

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बुखार से शुरू हुई परेशानी, तेजी से बिगड़ी हालत

गांववालों के मुताबिक शुरुआत कुछ लोगों में तेज बुखार, खांसी, उल्टी, बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी से हुई। कुछ मरीजों की हालत अचानक इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन कई की जान नहीं बचाई जा सकी। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि कई लोग महज कुछ दिनों में ही गंभीर अवस्था में पहुंच गए। इससे बीमारी की प्रकृति को लेकर आशंकाएं और बढ़ गई हैं।

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400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग, 300 के ब्लड सैंपल

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर व्यापक जांच अभियान शुरू किया है। अब तक 400 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और करीब 300 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में दो लोगों में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि केवल इन मामलों के आधार पर सभी मौतों की वजह तय नहीं की जा सकती।

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पानी में बैक्टीरिया और कम क्लोरीन की पुष्टि

जांच के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने गांव के पीने के पानी के नमूने भी प्रयोगशाला में भेजे। शुरुआती रिपोर्ट में कई घरों के पानी में बैक्टीरिया पाए गए हैं और क्लोरीन की मात्रा मानक से कम पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण हो सकता है। लंबे समय तक टंकियों में जमा पानी और साफ-सफाई की कमी भी जोखिम बढ़ाती है।

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अलग-अलग स्रोतों से पानी, बढ़ता संक्रमण का खतरा

छायंसा गांव में लोग सरकारी सप्लाई, टैंकर और आरओ जैसे अलग-अलग स्रोतों से पानी का उपयोग करते हैं। कई घरों में पानी लंबे समय तक स्टोर रहता है, जिससे उसमें संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को उबला हुआ और साफ पानी पीने, पानी की टंकियों की नियमित सफाई करने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है।

मेडिकल टीमें तैनात, गंभीर मरीज अस्पताल में भर्ती

गांव में कई मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। जिन मरीजों की हालत गंभीर है उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है, जबकि अन्य लोगों की निगरानी गांव में ही की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मौतों की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच जारी है। जल स्रोतों, संक्रमण के पैटर्न और मेडिकल इतिहास का विश्लेषण किया जा रहा है।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक कई लोगों में बुखार और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल लक्षण दिखना अक्सर जलजनित संक्रमण की ओर इशारा करता है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले लैब रिपोर्ट और महामारी विज्ञान संबंधी अध्ययन जरूरी हैं। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, साफ पानी की उपलब्धता और सामुदायिक जागरूकता ही स्थिति को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जांच पूरी होने तक सतर्कता ही बचाव

छायंसा गांव में स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस यह सुनिश्चित करना है कि और जानें न जाएं। जब तक बीमारी की स्पष्ट वजह सामने नहीं आती, तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है। साफ पानी, स्वच्छता और समय पर इलाज. यही इस समय गांव के लिए सबसे अहम ढाल है।

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