
मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब सिर्फ रॉकेट और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहा। युद्ध का चेहरा तेजी से बदल रहा है और तकनीक ने इसे पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक बना दिया है। हाल के दिनों में हिज्बुल्लाह ने एक ऐसे हथियार का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसने इजराइली सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यह हथियार है फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन, एक ऐसा ड्रोन जिसे न तो आसानी से ट्रैक किया जा सकता है और न ही पारंपरिक तरीके से जाम किया जा सकता है।
दक्षिणी लेबनान से सामने आए एक वीडियो में ऐसा ड्रोन इमारतों के ऊपर बेहद नीचे उड़ते हुए सीधे एक इजराइली टैंक तक पहुंचता दिखाई देता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक आधुनिक युद्ध में बड़ा बदलाव ला सकती है क्योंकि यह पारंपरिक एंटी-ड्रोन सिस्टम को लगभग बेअसर कर देती है।
आमतौर पर ड्रोन रेडियो या वायरलेस सिग्नल के जरिए कंट्रोल किए जाते हैं। इन्हीं सिग्नलों को ट्रैक या जाम करके सेना ड्रोन को रोकती है। लेकिन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन पूरी तरह अलग तकनीक पर आधारित हैं। इन ड्रोन में एक बेहद पतली फाइबर-ऑप्टिक केबल लगी होती है, जो सीधे ऑपरेटर से जुड़ी रहती है। यही केबल ड्रोन को कंट्रोल करने और कैमरे से लाइव वीडियो भेजने का काम करती है। यह केबल इतनी पतली होती है कि खुली आंखों से देखना मुश्किल हो जाता है और इसकी लंबाई लगभग 15 किलोमीटर तक हो सकती है। यानी ऑपरेटर काफी दूर और सुरक्षित जगह पर बैठकर ड्रोन को सटीक तरीके से चला सकता है। चूंकि इसमें वायरलेस सिग्नल का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम भी इसे रोकने में असफल हो जाते हैं।
यह भी पढ़ें: Delhi Fire: जली लाशें, काली दीवारें और बिलखते परिजन-घटनास्थल के फोटो-वीडियो देख दहल गए लोग
इजराइली सेना के मुताबिक, ऐसे ही एक हमले में 19 वर्षीय सैनिक इदान फूक्स की मौत हो गई, जबकि कई अन्य सैनिक घायल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला इतना सटीक था कि ड्रोन सीधे सैन्य वाहन तक पहुंच गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब घायलों को निकालने पहुंचे हेलीकॉप्टर को भी अतिरिक्त ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। इससे यह संकेत मिलता है कि हिज्बुल्लाह अब सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन को भी निशाना बनाने की रणनीति अपना रहा है।
फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन का इस्तेमाल सबसे पहले बड़े स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में देखा गया था। रूस ने इन ड्रोन को युद्ध के मैदान में काफी प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया। बाद में इन्हें और विकसित किया गया ताकि ऑपरेटर फ्रंटलाइन से कई किलोमीटर दूर रहकर भी हमला कर सके। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हिज्बुल्लाह ने इसी मॉडल को अपनाया है। माना जा रहा है कि संगठन चीन या ईरान से सामान्य कमर्शियल ड्रोन खरीदता है और उनमें ग्रेनेड या अन्य विस्फोटक जोड़कर उन्हें हथियार में बदल देता है। कम लागत और उच्च सटीकता की वजह से ये ड्रोन पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में ज्यादा उपयोगी साबित हो रहे हैं।
अब तक इजराइल सहित कई देशों की सेनाएं ड्रोन को रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का इस्तेमाल करती थीं। इन सिस्टम का मुख्य काम ड्रोन के रेडियो सिग्नल को जाम करना होता है। लेकिन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन में कोई रेडियो सिग्नल ही नहीं होता। यही वजह है कि मौजूदा एंटी-ड्रोन तकनीक इनके सामने कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन्हें रोकने के लिए जाल, फिजिकल बैरियर या सीधे शूटडाउन जैसे पारंपरिक उपाय ही फिलहाल कारगर हो सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि लगातार संघर्ष के कारण हिज्बुल्लाह के रॉकेट और मिसाइल भंडार में कमी आई है। ऐसे में संगठन अब कम लागत वाले लेकिन अत्यधिक सटीक ड्रोन हमलों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। यह रणनीति न केवल आर्थिक रूप से सस्ती है बल्कि छोटे स्तर पर भी बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है। खास बात यह है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल सीमित संसाधनों के बावजूद लंबे समय तक किया जा सकता है।
फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन यह दिखाते हैं कि भविष्य के युद्ध सिर्फ भारी हथियारों से नहीं, बल्कि स्मार्ट और सस्ती तकनीकों से भी लड़े जाएंगे। जिस तकनीक को कभी सीमित प्रयोग माना जा रहा था, वही अब बड़े सैन्य देशों के लिए चुनौती बनती जा रही है। इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह नई तकनीक आने वाले समय में मध्य पूर्व की सुरक्षा रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान पर कड़ा वार! सीमा पार निवेश पर रोक, भारत का विदेशी निवेश नियमों में चौंकाने वाला बदलाव
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।