Khamenei Death News: आखिरकार भारत ने तोड़ी चुप्पी, ईरानी दूतावास जाकर विदेश सचिव ने जताया शोक

Published : Mar 05, 2026, 05:11 PM IST
Khamenei Death News: आखिरकार भारत ने तोड़ी चुप्पी, ईरानी दूतावास जाकर विदेश सचिव ने जताया शोक

सार

ईरानी नेता खामेनेई की मौत पर विपक्ष की आलोचना के बाद भारत ने आधिकारिक शोक जताया है। विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास जाकर शोक व्यक्त किया। कांग्रेस ने पीएम की चुप्पी को शर्मनाक बताते हुए इसे विदेशी दबाव का नतीजा बताया है।

नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत ने आखिरकार शोक जता दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। उन्होंने दूतावास में रखी गई शोक पुस्तिका पर दस्तखत किए और ईरान के राजदूत से मुलाकात भी की। खामेनेई की मौत पर अब तक कोई प्रतिक्रिया न देने के लिए विपक्ष केंद्र सरकार पर तीखे हमले कर रहा था। विपक्ष का कहना था कि सरकार की चुप्पी भारत के लिए शर्मनाक है। इसी आलोचना के बाद भारत ने आधिकारिक तौर पर अपना शोक संदेश भेजा है।

'संघर्ष दरवाजे पर, फिर भी प्रधानमंत्री चुप'

इस बीच, श्रीलंकाई तट पर ईरानी जहाज को डुबोए जाने की घटना पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर हमला और तेज कर दिया है। कांग्रेस ने कहा कि मेहमान को बुलाकर अपमानित किया गया और कुछ न बोलने की भारत की नीति शर्मनाक है। राहुल गांधी ने आलोचना करते हुए कहा कि संघर्ष दरवाजे तक पहुंच गया है, लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं। राहुल ने अपनी प्रतिक्रिया में यह आरोप भी दोहराया कि प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कहा कि प्रधानमंत्री दूसरों की कठपुतली बन गए हैं। अमेरिका के सामने यह सरेंडर देश की गरिमा को खत्म कर रहा है। प्रधानमंत्री इजरायल क्यों गए थे? खामेनेई की मौत पर प्रधानमंत्री ने एक शब्द नहीं बोला। क्या 'एपस्टीन गैंग' से इजाजत मिलने के बाद ही प्रधानमंत्री अपनी चुप्पी तोड़ेंगे? 

खेड़ा ने कहा कि मोदी 'एपस्टीन गैंग' की गिरफ्त में हैं। 38 जहाज और बारह हजार नाविक फंसे हुए हैं। प्रधानमंत्री की कार्यशैली में 'वसुधैव कुटुंबकम' का अंश मात्र भी नहीं है। प्रधानमंत्री की चुप्पी आपराधिक है। यह देश की छवि पर लगा एक धब्बा है। बजट सत्र से यह साफ हो गया था कि प्रधानमंत्री दबाव में हैं। मोदी पर 'एपस्टीन फाइल' और गौतम अडानी का दबाव है। पेट्रोलियम मंत्री कहां हैं, किसी को नहीं पता। वे एपस्टीन की गिरफ्त में हैं। केंद्र के मंत्री चुप हैं। मंत्री कहां हैं? विदेश मंत्री मुस्कुरा रहे हैं। एपस्टीन का गैंग तो लोकतंत्र को ही खत्म कर रहा है। सरकार को सिर्फ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की जल्दी है। निंदा तक नहीं कर पा रहे हैं। क्या यही नया भारत है? 

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