
नई दिल्ली: देश की परीक्षा प्रणाली में बार-बार लग रहे सेंधमारी के दाग को हमेशा के लिए धोने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में आमूल-चूल बदलाव लाने और करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक ऐसी 'सुपर टास्क फोर्स' का गठन किया गया है, जिसकी ताकत ने परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क में खलबली मचा दी है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली इस टीम के पास देश के सबसे सुरक्षित डिजिटल और रणनीतिक चक्रव्यूह बनाने का अनुभव है। सूत्रों के मुताबिक, इस टास्क फोर्स के सदस्यों के चयन में जो बारीकी और सोच-विचार दिखाया गया है, वह साफ करता है कि सरकार अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। यह टीम चार सबसे बड़े मोर्चों-टेक्नोलॉजी, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासन-का एक ऐसा अभेद्य किला तैयार करने जा रही है, जिसे भेदना नामुमकिन होगा। आइए जानते हैं इस टीम के उन महायोद्धाओं के बारे में जो परीक्षा तंत्र को हमेशा के लिए बदलने वाले हैं।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi shares a video and says, "The Government of India is continuously taking various measures for the future of students. Those who tampered with the students' future are languishing in jail. We have already established fast-track courts. We are… https://t.co/Jlw6NVlhQX pic.twitter.com/aDK6jfoIvT
— ANI (@ANI) July 26, 2026
टास्क फोर्स के मुखिया नंदन नीलेकणि भारत के डिजिटल रिवॉल्यूशन के जनक माने जाते हैं। आधार और UPI जैसी पारदर्शी व विशालकाय डिजिटल प्रणालियों को खड़ा करने का उनका अनुभव इस टास्क फोर्स की सबसे बड़ी रीढ़ है।
हैक-प्रूफ प्लेटफॉर्म: नीलेकणि परीक्षाओं के लिए एक ऐसा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसे हैक या इंटरसेप्ट करना नामुमकिन होगा।
ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ इस टीम में एक ऐसी कार्यप्रणाली लेकर आ रहे हैं, जहाँ गलती की गुंजाइश शून्य प्रतिशत होती है। जिस तरह एक रॉकेट लॉन्चिंग में हर सेकंड की गिनती होती है, ठीक वैसी ही सुरक्षा अब परीक्षा प्रणाली को मिलेगी।
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इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका इस टास्क फोर्स के वो खुफिया हथियार हैं, जो पेपर लीक होने से पहले ही उसकी साजिश को नाकाम कर देंगे।
प्रश्न पत्र का सुरक्षित तरीके से परीक्षा हॉल तक पहुंचना और बिना किसी विवाद के मूल्यांकन होना सबसे बड़ी चुनौती रही है। इस मोर्चे को देश के दो दिग्गज संभाल रहे हैं।
इस प्रकार, यह महा-टास्क फोर्स देश की परीक्षा प्रणाली में एक नया सवेरा लाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके बाद हर छात्र को अपनी मेहनत का पूरा फल बिना किसी डर के मिल सकेगा।
इस समिति की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी स्वरूप है।
टीम जिन चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम कर सकती है-
इन चारों क्षेत्रों का संयुक्त अनुभव परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में संभावित कमजोरियों की पहचान और सुधार के लिए उपयोगी हो सकता है।
टास्क फोर्स का गठन सरकार की व्यापक परीक्षा सुधार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, केवल समिति का गठन ही पर्याप्त नहीं होगा। इसकी सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करना, राज्यों और परीक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बनाना तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यदि तकनीकी सुधार, मजबूत सुरक्षा, पारदर्शी प्रशासन और समयबद्ध निगरानी एक साथ लागू होते हैं, तो भारत की परीक्षा प्रणाली पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकती है। आने वाले महीनों में इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इसी से तय होगा कि क्या देश वास्तव में पेपर लीक जैसी चुनौती पर स्थायी नियंत्रण की दिशा में बढ़ रहा है।
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