
नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने सोमवार को भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत (Manuscript Heritage) की मैपिंग के लिए एक बड़ा राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया है। यह अभियान 3 महीने तक चलेगा और इसे अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय प्रयास माना जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरे देश में मौजूद पांडुलिपियों की पहचान करना और उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना है।
यह सर्वेक्षण जिला स्तर से शुरू होगा और धीरे-धीरे राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ेगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य देशभर में मौजूद सभी पांडुलिपियों का पता लगाना और उनका एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है। सर्वेक्षण के दौरान जुटाई गई सारी जानकारी ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के केंद्रीय पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह डेटा एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (National Digital Repository) में सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।
इस सर्वे के दौरान सिर्फ संस्थानों के संग्रह ही नहीं, बल्कि निजी संरक्षकों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों को भी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इन पांडुलिपियों को जियोटैग (Geotag) भी किया जाएगा। जियोटैगिंग से यह पता लगाना आसान होगा कि पांडुलिपियां कहां सुरक्षित हैं और उनके संरक्षण, सुरक्षा और डिजिटलीकरण की क्या जरूरतें हैं।
संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि सर्वे टीमों को इस काम में ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप की मदद दी जाएगी। इस ऐप के जरिए टीमें सर्वे के दौरान मिली पांडुलिपियों की जानकारी सीधे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगी। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए भी किया जाएगा कि पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण एक तय और मानकीकृत फॉर्मेट में किया जाए। इससे भविष्य में ये पांडुलिपियां शोधकर्ताओं, छात्रों और आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
यह सर्वेक्षण पिछले साल सितंबर में विज्ञान भवन में आयोजित ‘ज्ञान भारतम’ कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी किए गए विजन डॉक्यूमेंट ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ के अनुरूप शुरू किया गया है। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह मिशन “भारत की संस्कृति, साहित्य और चेतना की घोषणा” साबित होगा।
माना जाता है कि भारत के पास दुनिया में पांडुलिपियों का सबसे बड़ा संग्रह है। अनुमान के अनुसार देश में लगभग 1 करोड़ पांडुलिपियां मौजूद हैं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिसकी घोषणा 2025-26 के बजट में भी की गई थी। उन्होंने कहा था कि यह पहल “बौद्धिक चोरी” (Intellectual Theft) को रोकने में भी मदद करेगी।
इस बड़े सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर इन समितियों की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे, जबकि जिला स्तर पर यह जिम्मेदारी ज़िलाधिकारियों (District Magistrates) को दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार संस्कृति मंत्रालय उन पांडुलिपियों को भी इस राष्ट्रीय डेटाबेस में शामिल करने पर काम कर रहा है, जिन्हें पहले से विभिन्न संस्थानों और राज्य सरकारों द्वारा डिजिटाइज़ किया जा चुका है। अनुमान है कि ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड की संख्या 10 लाख से अधिक है। इन सभी रिकॉर्ड को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़कर भारत की पांडुलिपि विरासत का एक व्यापक डिजिटल संग्रह तैयार किया जाएगा।
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