Great Nicobar: 13,000 करोड़ से बनेगा नया एयरपोर्ट, जानें क्या है केंद्र सरकार का मेगा प्लान?

Published : Jun 09, 2026, 05:23 PM IST
Great Nicobar

सार

केंद्र सरकार ग्रेट निकोबार द्वीप में 13,000 करोड़ रुपये की लागत से एक नया मिलिट्री-सिविलियन एयरपोर्ट बनाने जा रही है। इस प्रोजेक्ट को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इसे लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

नई दिल्ली: ग्रेट निकोबार द्वीप में 81,000 करोड़ रुपये के मेगा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यहां 13,000 करोड़ रुपये की लागत से एक नया ग्रीनफील्ड सिविल-मिलिट्री एयरपोर्ट बनाने का फैसला किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह एयरपोर्ट ग्रेट निकोबार के दक्षिण-पूर्वी तट पर गैलाथिया बे के पास चिंकन में बनाया जाएगा। यह एयरपोर्ट सेना और आम नागरिक, दोनों के इस्तेमाल के लिए होगा। यह प्रोजेक्ट कैंपबेल बे में मौजूद नौसेना के एयर स्टेशन आईएनएस बाज़ (INS Baaz) के विस्तार की जगह लाया गया है।

यह एयरपोर्ट रणनीतिक रूप से बहुत अहम है क्योंकि यह हिंद महासागर के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते, मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के पश्चिमी गेट के पास होगा। दुनिया का ज्यादातर कंटेनर ट्रैफिक और तेल के जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं। इस नए एयरपोर्ट से भारत की इस इलाके में निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से एक्शन लेने की क्षमता बढ़ जाएगी। इस एयरपोर्ट को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि इसे आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, लेकिन इसका पूरा कंट्रोल भारतीय नौसेना के पास ही रहेगा।

सरकार को नया एयरपोर्ट बनाने का फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि आईएनएस बाज़ के मौजूदा 4500 फीट के रनवे को 10,000 फीट तक बढ़ाना मुश्किल था। स्टडी में पता चला कि वहां की भौगोलिक बनावट और तकनीकी दिक्कतों के चलते रनवे का विस्तार करना बहुत मुश्किल है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि पुराने एयरपोर्ट का विस्तार करने से वहां रहने वाली आदिवासी जनजातियों, जंगल और जंगली जानवरों को भी बड़ा नुकसान पहुंचता।

यह एयरपोर्ट 81,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार द्वीप विकास प्रोजेक्ट का ही एक हिस्सा है। इस बड़े प्रोजेक्ट में गैलाथिया बे में एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल बनाना भी शामिल है। इसका मकसद माल ढुलाई के लिए सिंगापुर और कोलंबो जैसे विदेशी बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता को कम करना है। केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि एयरपोर्ट के साथ-साथ पावर प्लांट और टाउनशिप भी विकसित किए जाएंगे, ताकि ग्रेट निकोबार को एक ग्लोबल इकोनॉमिक और डिफेंस हब बनाया जा सके।

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया है। उन्होंने यह बात उस इलाके का दौरा करने और मूंगे की चट्टानों (coral reefs) के बीच स्कूबा डाइविंग करने के बाद कही। राहुल ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर डेढ़ करोड़ से ज़्यादा पेड़ काटे जाएंगे, मूंगे की चट्टानें तबाह हो जाएंगी और शोम्पेन जैसी विलुप्तप्राय जनजातियों को अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी।

विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर मकसद सिर्फ रक्षा है, तो मौजूदा आईएनएस बाज़ का विस्तार करने के बजाय इतने बड़े प्रोजेक्ट को लाने में पारदर्शिता की कमी है। विश्व पर्यावरण दिवस पर कांग्रेस ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ 'ग्रीन ओवर ग्रीड' (Green Over Greed) नाम से एक कैंपेन भी शुरू किया था। हालांकि, केंद्र सरकार अपने इस फैसले पर कायम है। उसका कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देश की सुरक्षा और आर्थिक तरक्की के लिए यह निवेश बहुत ज़रूरी है।

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