
BRICS Summit New Delhi: राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के शानदार आयोजन और भविष्य को लेकर पेश किए गए विजन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। दो दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में वैश्विक सहयोग, तकनीक, सतत विकास और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक मंथन हुआ। इसी बीच मिस्र के एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ ने BRICS को तकनीक के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए भारत के नेतृत्व की जमकर सराहना की है।
मिस्र के AI एक्सपर्ट अहमद अलशरकावी ने ANI से बातचीत में कहा कि सम्मेलन का आयोजन बेहद शानदार और सुनियोजित तरीके से किया गया। उन्होंने भारत को ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन में एक मजबूत नेतृत्वकर्ता बताया।
अलशरकावी के मुताबिक, BRICS का यह संस्करण खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Sovereign AI जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग और तालमेल बढ़ाने पर फोकस करेगा। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में AI को लेकर BRICS देशों की साझेदारी को भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित इस BRICS समिट की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रही। यानी सम्मेलन का मुख्य फोकस मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर था।
बैठक के दौरान तकनीकी सहयोग को मजबूत करने, विकासशील देशों की जरूरतों को प्राथमिकता देने और वित्तीय साझेदारी को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच BRICS को सहयोग के एक मजबूत मंच के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
सम्मेलन की सबसे अहम उपलब्धियों में ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ को सर्वसम्मति से अपनाया जाना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि यह घोषणापत्र BRICS के बढ़ते दायरे और मजबूत होते उद्देश्यों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस डिक्लेरेशन में इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और लोगों के बीच आपसी संबंधों को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों की उम्मीदों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए एक मजबूत सहयोगी व्यवस्था तैयार करना है।
भविष्य के रोडमैप को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS देश कई नई तकनीकों और क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप्स, MSMEs, विज्ञान और रिसर्च जैसे क्षेत्र शामिल हैं। तकनीक के इन क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से सदस्य देशों को नई खोज, इनोवेशन और डिजिटल विकास में एक-दूसरे की क्षमता का फायदा मिल सकता है।
BRICS देशों ने न्यू डेवलपमेंट बैंक को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति बनी। इन फैसलों को वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इस सम्मेलन में BRICS की 20 साल की यात्रा और उसकी राजनयिक उपलब्धियों का भी जश्न मनाया गया। इस खास मौके पर भारत ने दो स्मारक डाक टिकट जारी किए, जो वैश्विक संवाद और सहयोग के मंच के रूप में BRICS के विकास को दर्शाते हैं।
पर्यावरण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य BRICS नेताओं ने कार्यक्रम स्थल पर बरगद के पौधे भी लगाए। भारतीय संस्कृति में बरगद को मजबूती, सहनशीलता और लंबे जीवन का प्रतीक माना जाता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और टिकाऊ भविष्य बनाने के सदस्य देशों के साझा संकल्प का संदेश देती है।
BRICS का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह मंच अब वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बनता जा रहा है। संगठन में वर्तमान में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 सदस्य देश शामिल हैं।
इसके अलावा साझेदार देशों की बढ़ती भागीदारी ने BRICS के वैश्विक सहयोग के दायरे को और व्यापक बनाया है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें शिखर सम्मेलन ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में AI, तकनीक, विकास और वैश्विक सहयोग BRICS के एजेंडे में सबसे अहम स्थान रखने वाले हैं।
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