ईरान में ‘इंटरनेट किल स्विच’ क्या है और सरकार ने इसे विरोध के बीच क्यों चालू किया?

Published : Jan 11, 2026, 01:37 PM IST

Iran Internet Crisis: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने कोल्ड वॉर दौर का ‘इंटरनेट किल स्विच’ सक्रिय कर दिया। देश की कनेक्टिविटी 2% से भी कम रह गई है। सवाल है—क्या डिजिटल ब्लैकआउट से सच दबाया जा सकता है? 

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NetBlocks Iran Report: ईरान एक बार फिर पूरी दुनिया की नजरों में है, लेकिन इस बार वजह सिर्फ सड़क पर उतरते लोग नहीं हैं। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान में जिस तरह से अचानक देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट हुआ, उसने “कोल्ड वॉर के समय के किल स्विच” को लेकर डर और बहस दोनों को जन्म दे दिया है। ईरानी सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से गिरकर 2% से भी कम रह गई है। इसका असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग, अस्पताल, जरूरी सेवाएं और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी ठप पड़ गई है।

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इंटरनेट ‘किल स्विच’ आखिर है क्या?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरनेट किल स्विच एक ऐसा केंद्रीकृत सिस्टम होता है, जिसे सरकार एक बटन दबाकर पूरे देश में इंटरनेट बंद करने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। नेटब्लॉक्स के CEO अल्प टोकर के अनुसार, यह सिस्टम ऊपर से नीचे तक नियंत्रित होता है, यानी जनता के पास न तो इसका विरोध करने का कोई कानूनी रास्ता होता है और न ही कोई तकनीकी विकल्प। यह तकनीक कोल्ड वॉर के दौर से विकसित की गई थी, ताकि संकट की स्थिति में संचार पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।

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ईरान ने इसे अभी क्यों सक्रिय किया?

ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। ये प्रदर्शन शुरुआत में महंगाई और आर्थिक संकट को लेकर थे, लेकिन अब ये सीधे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को चुनौती दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने इंटरनेट इसलिए बंद किया ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के वीडियो बाहर न जाएं, प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संपर्क टूट जाए और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक सही जानकारी न पहुंचे।

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इंटरनेट बंद होने से आम लोगों पर क्या असर पड़ा?

इंटरनेट ब्लैकआउट का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ा है। बैंकिंग सेवाएं बाधित, अस्पतालों और आपात सेवाओं में दिक्कत, लोग अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे। देश पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईरान का अब तक का सबसे गंभीर इंटरनेट ब्लैकआउट है।

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अमेरिका और रेज़ा पहलवी की भूमिका क्या है?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। वहीं, निर्वासन में रह रहे पूर्व क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने भी लोगों से संवाद बहाल करने की अपील की है।

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क्या इंटरनेट बंद करके आंदोलन रोका जा सकता है?

सबसे बड़ा सवाल यही है। इतिहास बताता है कि इंटरनेट बंद किया जा सकता है, लेकिन लोगों की नाराज़गी नहीं। ईरान में अब तक 72 लोगों की मौत और 2,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, फिर भी विरोध थमने के संकेत नहीं दिख रहे।

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ईरान का इंटरनेट ‘किल स्विच’ सिर्फ एक तकनीकी कदम नहीं, बल्कि सत्ता और जनता के बीच बढ़ते टकराव का संकेत है। अब देखना यह है कि डिजिटल अंधेरा कितने समय तक सच्चाई को छुपा पाएगा।

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