
मिडिल ईस्ट की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दुनिया जहां उम्मीद कर रही थी कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत से हालात सामान्य होंगे, वहीं तेहरान ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी नई वार्ता का कोई प्लान नहीं है। इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में तनाव और गहरा सकता है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि अमेरिका के साथ अगली बातचीत को लेकर कोई तैयारी नहीं चल रही है। उनका लहजा साफ था—जब तक हालात नहीं बदलते, तब तक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं है। यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के रिश्तों में पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई है।
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ईरान ने अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। बघाई के मुताबिक, अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ उसके कदम भरोसा तोड़ने वाले होते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार सीजफायर का उल्लंघन और ईरान को दोषी ठहराने की कोशिश यह दिखाती है कि वॉशिंगटन बातचीत को लेकर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है।
तेहरान का दावा है कि अमेरिका ने लेबनान से जुड़े समझौतों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इसके अलावा ईरान पर समुद्री नाकेबंदी की कोशिश और एक कारोबारी जहाज पर कथित हमला भी भरोसे को और तोड़ने वाला साबित हुआ। ईरान इन घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ मानता है और इसे सीजफायर की भावना के विपरीत बताता है।
ईरान ने यह भी खुलासा किया कि इन सभी मुद्दों को पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता में उठाया गया था। इस्लामाबाद में 10 बिंदुओं का प्रस्ताव भी रखा गया, जिस पर चर्चा हुई। लेकिन ईरान का कहना है कि इसके बावजूद अमेरिका के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया, जिससे बातचीत की संभावना और कमजोर हो गई।
ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पहले पूरी तरह सुरक्षित था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। तेहरान इसके लिए अमेरिका और इजराइल की गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराता है। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है।
ईरान ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर अमेरिका या इजराइल की तरफ से कोई हमला होता है, तो उसकी सेना इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। तेहरान ने दोहराया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा हर हाल में करेगा और किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।
ईरान के ताजा रुख से यह साफ हो गया है कि जब तक भरोसा दोबारा नहीं बनता, तब तक अमेरिका के साथ नई बातचीत की संभावना बेहद कम है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ने की आशंका है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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