
तेहरान: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता तो चल रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वान्स के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के जांचकर्ताओं को फिर से आने की इजाजत देने के लिए तैयार हो गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि परमाणु जांच को लेकर अमेरिका को कोई नया भरोसा नहीं दिया गया है। दोनों देशों के बड़े अधिकारी कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में यह अहम बातचीत कर रहे हैं।
पहले दौर की बातचीत के बाद जेडी वान्स ने मीडिया से कहा था कि ईरान इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के प्रतिनिधियों को वापस बुलाने पर सहमत हो गया है और इसके लिए जल्द ही बातचीत शुरू होगी। उन्होंने इसे अमेरिकी लोगों के लिए एक बड़ी जीत बताया था। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान परमाणु जांच के लिए मान जाएगा।
लेकिन, ईरान ने इन सभी दावों को पूरी तरह से झूठा बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, 'परमाणु जांचकर्ताओं की वापसी को लेकर ईरान ने किसी नए समझौते पर दस्तखत नहीं किए हैं। IAEA के साथ कोई भी सहयोग ईरान की संसद और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के बनाए मौजूदा कानूनों के तहत ही होगा।'
बता दें कि जब ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर जांचकर्ताओं को जाने से रोक दिया था, तब IAEA ने अपने सभी जांचकर्ताओं को ईरान से वापस बुला लिया था। इस विवाद के बावजूद, बातचीत के हिस्से के तौर पर अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में कुछ वक्त के लिए ढील दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 60 दिनों का एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत ईरान दशकों बाद पहली बार अमेरिकी डॉलर में अपना तेल बेच सकेगा। इस छूट से आने वाले दिनों में ईरान का कच्चा तेल सीधे अमेरिका भी आ सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया था कि 21 अगस्त तक की इस अस्थायी छूट के बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु जांच की इजाजत देने पर सहमत हुआ है। लेकिन अब जब ईरान ने परमाणु समझौते की शर्तों से इनकार कर दिया है, तो दुनिया भर में यह चिंता बढ़ गई है कि कहीं यह बातचीत फिर से पटरी से न उतर जाए। दोनों पक्षों ने 60 दिनों के अंदर एक आखिरी शांति समझौते पर पहुंचने का ड्राफ्ट तैयार किया है।
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