
वॉशिंगटन: अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक जंग अब एक बेहद इमोशनल मोड़ पर आ गई है। ईरान ने कैरोलिन को हाल ही में हुए बच्चे के जन्म पर बधाई तो दी, लेकिन साथ में मीनाब स्कूल नरसंहार की याद भी दिला दी। ईरान का यह संदेश अब दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है।
ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "जब आप अपने बच्चे को चूमती हैं, तो उस प्यार और सुरक्षा को महसूस करते हुए मीनाब स्कूल में मारे गए उन मासूम बच्चों के माता-पिता का दर्द भी याद रखिएगा।" 'जब अपनी बच्ची को चूमना, तो मीनाब को मत भूलना' - यह संदेश एक डिप्लोमैटिक नोट से कहीं ज़्यादा, एक कड़ी चेतावनी और विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। यह उस मिसाइल हमले में अमेरिका की कोई भूमिका न होने के पुराने दावे पर भी एक तीखा तंज है, जिसमें करीब 150 लड़कियों की जान चली गई थी।
ईरान का मुख्य आरोप है कि मीनाब त्रासदी के वक्त अमेरिका ने आम नागरिकों की मौत की जानकारी छिपाई थी और कैरोलिन लीविट ने मीडिया के सामने इस दर्दनाक घटना को मामूली बताने की कोशिश की थी। ईरान का कहना है कि उस हमले में मारे गए हर बच्चे के भी सपने थे और उन्हें प्यार करने वाले माता-पिता थे, ठीक कैरोलिन के बच्चे की तरह।
हालांकि, किसी की निजी ज़िंदगी की खुशी को एक राजनीतिक त्रासदी से जोड़ने का ईरान का यह कदम काफी असामान्य है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे एक तरह का मनोवैज्ञानिक युद्ध (psychological warfare) बता रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान इसके ज़रिए अमेरिकी अधिकारियों को उनके फैसलों के अंजाम का अहसास इमोशनल तरीके से कराना चाहता है।
मीनाब स्कूल की त्रासदी अब सिर्फ एक डिप्लोमैटिक विवाद न रहकर, दोनों देशों के बीच गहरी नफ़रत का प्रतीक बन गई है। ईरान सच सामने लाने की अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। इस इमोशनल रिमाइंडर के ज़रिए ईरान की कोशिश कैरोलिन लीविट और अमेरिकी प्रशासन को पूरी दुनिया के सामने बैकफुट पर धकेलने की है।
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