
Jaipur Encroachment Drive: जयपुर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, कुछ इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाई गई है, कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बंद की गई है और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। यह पूरा अभियान जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (JDA) और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से जगतपुरा क्षेत्र में चलाया जा रहा है।
इस अभियान के दौरान सबसे अधिक चर्चा नूरानी मस्जिद से जुड़े मामले की हो रही है। रविवार शाम मस्जिद कमेटी और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मोती डूंगरी रोड स्थित मुसाफिर खाना में एक सामूहिक बैठक और प्रार्थना सभा आयोजित की। इस दौरान प्रस्तावित कार्रवाई पर चर्चा हुई और समुदाय के कई लोगों ने इसका विरोध जताया।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि समुदाय अपने हाथों से मस्जिद को हटाने का फैसला नहीं कर सकता। उनका कहना था कि यदि मस्जिद के आकार को 40 फीट से घटाकर 20 फीट करने जैसा कोई समाधान निकले तो वहां नमाज जारी रह सकती हैं, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।
बैठक के दौरान विधायक रफीक खान ने कहा कि वहां आजादी से पहले की एक मजार मौजूद है और उस स्थान पर नमाज भी अदा की जाती है। उन्होंने दावा किया कि नूरानी मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वह वर्ष 1981 में खरीदी गई थी। उनका कहना था कि JDA का मास्टर प्लान वर्ष 2000 के बाद लागू हुआ, जबकि जमीन का सौदा उससे काफी पहले हो चुका था। रफीक खान ने यह भी बताया कि इस भूमि के लिए 29 जून 1994 को जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी में विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) जमा कराया गया था। उनके अनुसार, बाद में बिना भौतिक सत्यापन के इस सड़क को 80 फीट चौड़ी सड़क के रूप में चिह्नित किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर संबंधित अधिकारियों से कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने यह भी कहा कि इलाके में नमाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है और सामूहिक बैठक के दौरान मौजूद लोगों की तुलना में पुलिस बल की संख्या अधिक दिखाई दे रही थी।
विधायक ने कहा कि समुदाय अपने अधिकारों के लिए कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ेगा और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखेगा। उन्होंने सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी संस्कृति बनाए रखने की भी बात कही।
दूसरी ओर, प्रशासन और JDA का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह सड़क 80 फीट चौड़ी दर्ज है। अधिकारियों के मुताबिक इसी आधार पर सड़क के दायरे में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों और निर्माणों को नोटिस जारी किए गए थे। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
करीब 1.5 किलोमीटर लंबी यह सड़क मालवीय नगर और नंदपुरी कॉलोनी को जगतपुरा और प्रताप नगर से जोड़ती है। इसके अलावा यह सड़क जगतपुरा रेलवे स्टेशन और जयपुर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करती है।
वर्तमान में सड़क के किनारों पर हुए अतिक्रमण के कारण यहां अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। मॉडल टाउन, मालवीय नगर, झालाना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को जगतपुरा फ्लाईओवर, हरे कृष्ण मार्ग, बालाजी मोड़ और एपेक्स सर्किल जैसे मार्गों से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे इन प्रमुख सड़कों पर भी यातायात का दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा लोगों को जगतपुरा रेलवे क्रॉसिंग से होकर गुजरना पड़ता है। जब भी रेलवे फाटक बंद होता है, तब ट्रैफिक जाम और अधिक गंभीर हो जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने के बाद यह सड़क पूरी 80 फीट चौड़ी हो जाएगी। इसके बाद मालवीय नगर, पत्रिका गेट और शहर के अन्य हिस्सों से आने वाले वाहन सीधे रेलवे लाइन के समानांतर बनी सड़क के पार स्थित कॉलोनियों तक पहुंच सकेंगे। इससे जगतपुरा रेलवे स्टेशन और जयपुर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक और सुविधाजनक मार्ग उपलब्ध होगा। प्रशासन का मानना है कि सड़क चौड़ी होने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी पहले से बेहतर हो जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक धार्मिक ढांचों सहित अन्य अतिक्रमण करने वालों को पहले ही नोटिस देकर स्वयं निर्माण हटाने के लिए समय दिया गया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने सीधे कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को चलाए गए अभियान के दौरान पांच धार्मिक ढांचों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इनमें एक मस्जिद, दो मंदिर, एक सत्संग हॉल और एक मज़ार शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि ये सभी ढांचे सड़क के लिए निर्धारित भूमि (राइट-ऑफ-वे) के दायरे में आते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अफवाह, गलत जानकारी या ऐसी सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने, बिना पुष्टि वाली जानकारी साझा न करने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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