
कभी देश के लिए सैकड़ों पदक जीतकर तिरंगा बुलंद करने वाले भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा के परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा के निधन के महज चार दिन बाद उनकी मां श्यामा देवी राणा का भी निधन हो गया। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि इकलौते बेटे को खोने का गहरा सदमा वह सहन नहीं कर सकीं।
मंगलवार सुबह 78 वर्षीय श्यामा देवी राणा ने नई दिल्ली के एक सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक ही सप्ताह के भीतर मां और बेटे के निधन की खबर से न केवल राणा परिवार बल्कि खेल जगत और उनके शुभचिंतक भी शोक में डूब गए हैं।
परिजनों के अनुसार, 49 वर्षीय जसपाल राणा के 12 जून को हुए निधन के बाद से श्यामा देवी मानसिक रूप से बेहद टूट गई थीं। बेटे के जाने का गहरा असर उनकी सेहत पर भी पड़ा और उनकी तबीयत लगातार खराब होती चली गई। बताया जा रहा है कि उन्हें उपचार के लिए नई दिल्ली के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को उनका निधन हो गया। परिवार के करीबी रिश्तेदार दिनेश गौड़ ने भी इस दुखद समाचार की पुष्टि की है।
यह त्रासदी परिवार के लिए और भी अधिक दर्दनाक इसलिए है क्योंकि जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा को कुछ ही दिनों के भीतर अपने बेटे और पत्नी दोनों को खोने का दुख झेलना पड़ा है। नारायण सिंह राणा उत्तराखंड की राजनीति का जाना-पहचाना नाम रहे हैं और पूर्व खेल मंत्री भी रह चुके हैं। परिवार पर आए इस दोहरे आघात से रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में भी गहरा शोक है।
जसपाल राणा की बहन सुषमा राणा का विवाह उत्तर प्रदेश के नोएडा से विधायक पंकज सिंह से हुआ है। पंकज सिंह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र हैं।
इस दुखद घटना के बाद राजनीतिक और खेल जगत से जुड़े कई नेताओं, खिलाड़ियों और सामाजिक हस्तियों ने राणा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले जसपाल राणा का 12 जून को निधन हो गया था। जानकारी के अनुसार, जर्मनी से भारत लौटते समय विमान में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। भारत पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर ने खेल जगत को स्तब्ध कर दिया था। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा देहरादून से वाराणसी तक सड़क, हवाई और जलमार्ग के माध्यम से पूरी की गई थी।
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 600 से अधिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। साल 1994 में उन्होंने जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा उन्होंने कई युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षित किया और भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिभाएं दीं।
जसपाल राणा और उनकी मां श्यामा देवी का कुछ ही दिनों के अंतराल में निधन एक ऐसी पारिवारिक त्रासदी बन गया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। एक मां अपने बेटे के जाने का दर्द सहन नहीं कर सकी और कुछ ही दिनों बाद दुनिया को अलविदा कह गई। राणा परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है, जबकि खेल जगत एक ऐसे खिलाड़ी और एक ऐसी मां को याद कर रहा है, जिनका जीवन संघर्ष, समर्पण और प्रेरणा का प्रतीक रहा।
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