JSSC Paper Leak: रांची में छात्रों पर लाठीचार्ज, CBI जांच की मांग, झारखंड में क्यों मचा है बवाल?

Bimla Kumari   | CMS
Published : Aug 10, 2026, 11:48 AM IST
JPSC JSSC Protests Rock Ranchi

सार

JSSC CGL Paper Leak: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद बवाल मचा है. रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं, जिसके बाद अब CBI जांच की मांग तेज हो गई है. यह मामला राज्य में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पुराने विवादों की एक और कड़ी है.

Ranchi Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्र और पुलिस आमने-सामने आ गए. वजह थी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा का पेपर लीक होने का आरोप. इस कथित लीक के खिलाफ जब छात्र JSSC दफ्तर के पास प्रदर्शन करने पहुंचे तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें एक दर्जन से ज़्यादा छात्र घायल हो गए और करीब 20 को हिरासत में ले लिया गया.

अब छात्र इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अड़ गए हैं. उनका गुस्सा बेवजह नहीं है. 28 जनवरी को हुई परीक्षा खत्म होने से पहले ही उसके कथित प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी के स्क्रीनशॉट वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घूमने लगे थे.

क्या है JSSC CGL पेपर लीक का पूरा मामला?

यह भर्ती परीक्षा 2,017 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसके लिए 6 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. पेपर लीक के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. वहीं, JSSC ने 28 जनवरी को हुई परीक्षा के तीसरे पेपर (सामान्य ज्ञान) को रद्द कर दिया है और 4 फरवरी को होने वाली परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक के लिए टाल दिया है.

हालांकि, सरकारी कार्रवाई छात्रों के गुस्से को शांत नहीं कर पाई है. उनका कहना है कि उन्हें SIT की जांच पर भरोसा नहीं है और वे चाहते हैं कि पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI करे. इस भर्ती का विज्ञापन पहली बार 2015 में आया था और तब से यह कई बार रद्द हो चुकी है, जो अपने आप में छात्रों के लंबे इंतजार और हताशा को दिखाता है.

विवादों का पुराना इतिहास

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा विवाद कोई नया नहीं है. जब से बिहार से अलग होकर यह राज्य बना है, तभी से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की लगभग हर परीक्षा धांधली और अनियमितताओं के आरोपों से घिरी रही है. आलम यह है कि 23 सालों में JPSC सिर्फ सात सिविल सेवा परीक्षाएं ही करा पाया है, जबकि नियमतः हर साल एक परीक्षा होनी चाहिए थी.

JPSC की पहली परीक्षा के नतीजों को तो धांधली के चलते हाईकोर्ट ने ही रद्द कर दिया था. वहीं, छठी JPSC परीक्षा में भी कुछ खास उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए फाइनल रिजल्ट में हेरफेर के आरोप लगे थे और यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है. इसके अलावा, 2021 में सरकार की एक भर्ती नीति को भी हाईकोर्ट ने असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था, जिससे कई नियुक्ति प्रक्रियाएं रुक गईं.

सियासत और आगे की राह

छात्रों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीजेपी छात्रों की CBI जांच की मांग के साथ खड़ी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि 'पेपर लीक माफिया' के तार सरकार से जुड़े हैं.

सालों के इंतजार के बाद जब कोई परीक्षा होती है और उसका पेपर भी लीक हो जाए, तो छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता है. अब देखना यह है कि सरकार छात्रों की CBI जांच की मांग मानती है या SIT की जांच से ही मामले की लीपापोती करने की कोशिश होती है.

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