तस्वीर में नजर आ रहे सिंधिया वंश के महाराजा और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। जिनकी भक्ति और आस्था की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। जिन्होंने शाही परिधान पारंपरिक धोती और ओढ़नी पहनकर 300 साल पुरानी अनूठी परपंरा को निभाया।
दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित महाराज बाड़े स्थित गोरखी परिसर के देवघर में सालों पुरानी परंपरा और अनूठी पूजा करने के लिए पहुंचे थे। जहां उन्होंने बाबा मंसूर शाह के उर्स पर ना सिर्फ माथा टेका, बल्कि अपने परिवार की कुशलता और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी लिया।
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बता दें कि सिंधिया सोमवार को एक दिवसीय प्रवास पर ग्वालियर पहुंचे थे। यहां से वह अपने परिवार के साथ महाराज बाड़ा स्थित गोरखी के लिए रवाना हुए। जहां सिंधिया ने राज परिवार की परंपरा के अनुसार, पहले कुलदेवी की पूजा की और इसके बाद बाबा मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर चादरपोशी कर आशिर्वाद लिया।
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इतिहास के मुताबिक, बाबा शाह एक प्रसिद्ध सूफी संत हैं, जिन्हें चमत्कारी बाबा भी कहा जाता था। बताया जाता है कि जब सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया पानीपत के तीसरे युद्ध (1761) में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, तब ग्वालियर में उनके परिवार को उनकी चिंता होने लगी थी। तब महादजी सिंधिया की मां और पत्नी प्रसिद्ध सूफी संत बाबा मंसूर शाह की शरण में पहुंचीं और उनकी सलामती की दुआ मांगी। तभी संत मंसूर शाह ने कहा था कि महादजी सुरक्षित हैं और वे जल्द आपके बीच लौटेंगे। उस दिन से लेकर आज तक सिंधिया परिवार बाबा शाह के दरबार में पहुंचकर यह पूजा करता है।
जब महादजी वापस लौटे तो वह बाबा शाह के दरबार में पहुंचे। साथ ही सूफी संत ने महादजी सिंधिया को 'आधी रोटी' का टुकड़ा भेंट करते हुए आशीर्वाद दिया कि उनका राजवंश अगली पांच पीढ़ियों तक राज करेगा। तब से लेकर अब तक सिंधिया परिवार संत को आधी रोटी चढ़ाता है।
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बता दें कि सूफी संत की पूजा महादजी सिंधिया ने शुरू की थी। लेकिन तब से लेकर अब तक सिंधिया राजघराने में यह परंपरा 300 सालों से चली आ रही है। जहां राज परिवार के मुखिया हर साल देवघर गोरखी स्थित मंदिर में पूजा और बाबा मंसूर शाह औलिया के उर्स में शामिल होते हैं
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बता दें कि सिंधिया राजघराने का मुखिया हर साल देवघर गोरखी स्थित मंदिर में पूजा और बाबा मंसूर शाह औलिया के उर्स में शामिल होने पहुंचता है। बताया जाता है कि इस दौरान परिवार का मुखिया उर्स में तब तक में बैठता है, जब तक फूलों से सजे गुंबद का एक फूल नीचे नहीं गिरता
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