
Elon Musk Rahul Gandhi: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सरकार तीन कंपनियों को सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस दे चुकी है। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस शामिल हैं। हालांकि, लाइसेंस मिलने के बावजूद इन कंपनियों की व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन और जरूरी सुरक्षा मंजूरियां अहम होंगी।
यह मुद्दा उस समय चर्चा में आया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत में स्टारलिंक की मंजूरी को लेकर बातचीत हुई।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले में स्पष्ट रुख नहीं अपना रहा है। सिंधिया के मुताबिक, पहले कांग्रेस को एक व्यक्ति को लाइसेंस दिए जाने पर आपत्ति थी, लेकिन अब वही पार्टी लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठा रही है।
उनकी यह टिप्पणी राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच हुई बातचीत के बाद आई। इस बयान से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी और सरकार की नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सिंधिया ने बताया कि स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को लाइसेंस दिया गया है। हालांकि, लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां तुरंत अपनी सेवाएं शुरू कर सकती हैं। इसके लिए स्पेक्ट्रम आवंटन, सुरक्षा से जुड़ी शर्तों और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है।
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी के मुताबिक, दूरसंचार विभाग ने अनंतिम स्पेक्ट्रम जारी किया है। कंपनियों को संचालन शुरू करने से पहले संबंधित सुरक्षा मंजूरियां हासिल करनी होंगी। सरकार का कहना है कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
विवाद की शुरुआत एलन मस्क की एक्स पर की गई एक पोस्ट से हुई। मस्क ने सवाल उठाया कि स्टारलिंक 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त कर चुकी है और भारत सरकार की आवश्यकताओं का पालन करने के लिए वर्षों से प्रयास कर रही है, फिर भी भारत में लाइसेंस प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है।
इस पर राहुल गांधी ने भारत में उनका स्वागत करते हुए तंज कसा और कहा कि उन्हें तब तक इंतजार करना चाहिए, जब तक वह दूसरे व्यक्ति को नहीं खोज लेते। इसके जवाब में मस्क ने कहा कि यह स्थिति वास्तव में परेशान करने वाली है।
इस बातचीत ने भारत में स्टारलिंक की सेवाओं की शुरुआत को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। हालांकि, सरकार का कहना है कि लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया तय नियमों के तहत आगे बढ़ रही है।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए लाइसेंस के साथ-साथ स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी मंजूरियां भी जरूरी हैं। संचार मंत्रालय के मुताबिक, तीनों लाइसेंसधारियों के लिए सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया अहम है। गृह मंत्रालय की मंजूरी और अन्य जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही कंपनियां व्यावसायिक संचालन शुरू कर सकेंगी।
फिलहाल, स्टारलिंक की सेवाएं भारत में कब शुरू होंगी, इसकी निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में ग्राहकों को कंपनी और सरकार की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।
जानकारी के मुताबिक, स्टारलिंक समेत तीन कंपनियों को सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस दिया गया है। अन्य दो कंपनियां यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस हैं।
सेवाएं शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन, सुरक्षा संबंधी मंजूरी और अन्य नियामकीय शर्तें पूरी करना जरूरी है। लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियां तुरंत संचालन शुरू नहीं कर सकतीं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक, स्पेक्ट्रम आवंटन और जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद कंपनियां अपनी सेवाएं शुरू कर सकती हैं।
फिलहाल, सेवाएं शुरू होने की निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं है। इसके लिए संबंधित सुरक्षा मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार करना होगा।
एलन मस्क ने भारत में Starlink की लाइसेंस प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाया था। राहुल गांधी ने इस पर तंज भरा जवाब दिया, जिसके बाद मस्क ने स्थिति को परेशान करने वाला बताया। इसके बाद सिंधिया ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की आलोचना की।
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