कानपुर के अस्पताल में जन्म ही नहीं हुआ... फिर कैसे बन गए दर्जनों जन्म प्रमाण पत्र?

Published : Jun 30, 2026, 11:20 PM IST
kanpur dehat birth certificate scam jhinjhak chc fake birth certificate investigation

सार

कानपुर देहात के झींझक सीएचसी में कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। अस्पताल के रिकॉर्ड में नाम न होने के बावजूद प्रमाण पत्र बनने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। जानिए पूरा मामला और प्रशासन का जवाब।

सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल तब और गंभीर हो जाते हैं, जब पहचान का सबसे अहम आधार माने जाने वाले जन्म प्रमाण पत्रों में ही कथित गड़बड़ी सामने आए। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के झींझक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जुड़ा एक मामला अब जांच के दायरे में है, जहां आरोप है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में जन्म दर्ज न होने के बावजूद कई लोगों के जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

एक ही महीने में बड़ी संख्या में जारी हुए प्रमाण पत्र

मामला तब सामने आया जब सीएचसी के कंप्यूटर ऑपरेटर ने ही इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को 34 और 17 फरवरी 2026 को 38 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। इन प्रमाण पत्रों में जन्म वर्ष 2010 से 2026 तक दर्ज हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के नाम पर प्रमाण पत्र जारी हुए, उनका अस्पताल के जन्म रजिस्टर में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कई जिलों के लोगों के नाम शामिल

दस्तावेज बताते हैं कि 9 फरवरी को जारी 34 प्रमाण पत्रों में अधिकांश लाभार्थी कानपुर देहात के थे, जबकि कुछ नाम औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, हरदोई और रायबरेली के भी शामिल हैं। इसी तरह 17 फरवरी को जारी 38 प्रमाण पत्रों में भी कानपुर देहात के अलावा औरैया, कानपुर नगर, कन्नौज और जालौन के लोगों के नाम दर्ज हैं। इससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।

क्यों गंभीर है यह मामला?

जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक की पहली आधिकारिक पहचान माना जाता है। इसी दस्तावेज के आधार पर आधार कार्ड, स्कूल में प्रवेश, पासपोर्ट और कई सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाता है। यदि बिना वैध रिकॉर्ड के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, तो इसका असर पूरी दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर पड़ सकता है।

नियम क्या कहते हैं?

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, यदि किसी सरकारी अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है तो एक वर्ष के भीतर वहीं से जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। एक वर्ष से अधिक समय बीतने पर प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया तहसील स्तर से पूरी की जाती है।

जांच के आदेश, रिपोर्ट का इंतजार

मुख्य चिकित्सा अधिकारी जय गोविंद ने बताया कि झींझक और मैथा सीएचसी में कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने की शिकायत मिली है। जांच की जा रही है कि जिन लोगों के प्रमाण पत्र बने हैं, उनका जन्म वास्तव में संबंधित अस्पतालों में हुआ था या नहीं। वहीं, जिलाधिकारी कपिल सिंह ने कहा कि मामले की रिपोर्ट सीएमओ से मांगी गई है। नोडल अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

इंटरनेट बंद, सप्लाई पर असर और लगातार प्रदर्शन... PoK में क्यों उबल रहा है गुस्सा?
PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की सीधी बात, पश्चिम एशिया पर दिया बड़ा संदेश