
उत्तर प्रदेश के कानपुर में दो छोटी बहनों की एक सीधी-सादी शिकायत ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। ये पूरा मामला तब सामने आया जब डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) जितेंद्र कुमार सिंह ने एक दरियादिली दिखाई। यह घटना 'जनता दर्शन' कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां आम लोग सीधे अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याएं बताते हैं।
इस्बा खान और मरियम फातिमा नाम की दो बच्चियां अपनी मां शन्नो के साथ वहां पहुंची थीं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शिकायत की कि पारिवारिक विवाद में किसी ने उनकी गुल्लक तोड़ दी और उसमें जमा पैसे निकाल लिए।
परिवार के अनुसार, दोनों बहनें पहले मदद के लिए पास के पुलिस स्टेशन भी गई थीं। लेकिन वहां कथित तौर पर यह कहकर लौटा दिया गया कि यह एक छोटा घरेलू मामला है और कोई कार्रवाई नहीं की गई। हार न मानते हुए बच्चियों ने सीधे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से मिलने का फैसला किया। बातचीत के दौरान, इस्बा ने बताया कि उसने धीरे-धीरे सिक्के, पॉकेट मनी और रिश्तेदारों से मिले तोहफे के पैसे जमा किए थे। वह उन पैसों से एक स्कूल बैग और दूसरी जरूरी चीजें खरीदना चाहती थी। सुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि अपनी बचत खोने से बच्चियां बहुत दुखी दिख रही थीं।
इस शिकायत को सुनकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार सिंह ने स्थानीय पुलिस को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्होंने बच्चियों को अपने पास बुलाया और दोनों बहनों के लिए मिट्टी की नई गुल्लक और स्कूल बैग मंगवाए। एक भावुक पल में, DM ने खुद दोनों गुल्लकों में 1,000-1,000 रुपये डाले और बच्चियों से कहा कि उनकी बचत वापस आ गई है।
जो बच्चियां रोते हुए आई थीं, उनके चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई और उन्होंने हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा किया। उनकी मां ने भी अधिकारी को गंभीरता से उनकी बात सुनने के लिए धन्यवाद दिया।
बाद में, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि बच्चे कम उम्र से ही पैसे बचाने की आदत सीख रहे हैं।
यह कहानी ऑनलाइन तेजी से वायरल हो गई और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने अधिकारी की दरियादिली की तारीफ की और इसे इंसानियत और अच्छी लीडरशिप का उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा, "बहुत सराहनीय काम, एक अधिकारी को ऐसा ही होना चाहिए।"
एक अन्य ने कमेंट किया, "इस व्यक्ति और व्यक्तित्व को सलाम।" हालांकि, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि बच्चियों की बचत लेने के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दूसरों का तर्क था कि न्याय तभी पूरा होगा जब दोषियों को सजा मिलेगी। इस बहस के बावजूद, कई लोगों ने कहा कि इस भावुक पल ने दिखाया कि कैसे दयालुता के छोटे-छोटे काम भी एक बड़ा प्रभाव छोड़ सकते हैं।
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