PM Surya Ghar Yojana : छत पर बिजली, जेब में पैसा, कानपुर कैसे बना सोलर पावर हाउस

Published : Jan 16, 2026, 03:29 PM IST

कानपुर में पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना के तहत 20,756 सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जा चुके हैं और कुल क्षमता 64 मेगावाट तक पहुंच गई है। इससे सालाना 9.6 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे अतिरिक्त कमाई और पर्यावरण को बड़ा लाभ मिल रहा है।

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छत से रोशनी, जेब में बचत: कानपुर कैसे बन रहा है सोलर पावर का नया मॉडल

कानपुर अब सिर्फ औद्योगिक शहर नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे सोलर पावर हाउस के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। शहर की छतों पर लगे सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि लोगों की कमाई और पर्यावरण, दोनों में फायदा जोड़ रहे हैं। पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना के तहत कानपुर में सोलर रूफटॉप सिस्टम की कुल क्षमता 64 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जो प्रदेश में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

यूपी नेडा के आंकड़ों के मुताबिक, कानपुर जिले में अब तक 20,756 सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ कानपुर, प्रदेश में सोलर रूफटॉप स्थापना के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। शहर के व्यक्तिगत मकानों से लेकर बहुमंजिला इमारतों और हाउसिंग सोसाइटियों तक, हर जगह सोलर पैनल तेजी से लग रहे हैं।

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सालाना 9.6 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार, 64 मेगावाट की सौर क्षमता से हर साल लगभग 9.6 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मौजूदा बाजार दरों पर इसकी वार्षिक आर्थिक कीमत 34 से 38 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। यदि इतनी बिजली पारंपरिक स्रोतों से खरीदी जाती, तो सरकार और उपभोक्ताओं—दोनों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता।

सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाने वाले घरों और संस्थानों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। फरवरी 2024 में योजना की शुरुआत के बाद से जिले में सोलर सिस्टम लगाने की रफ्तार लगातार तेज बनी हुई है। फिलहाल प्रतिदिन औसतन 80 से 90 नए सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जो लोगों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

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35 हजार शहरी घरों की जरूरत हो सकती है पूरी

सोलर रूफटॉप से हो रहा उत्पादन इतना है कि इससे 30 से 35 हजार शहरी घरों की बिजली जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी इसका असर बड़ा है। 64 मेगावाट सौर उत्पादन से हर साल करीब 80 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ रही है, जो लगभग 35 लाख पेड़ लगाने के बराबर मानी जाती है।

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ज्यादा बिजली बने तो बेचकर भी कमाई

सोलर रूफटॉप की खास बात यह है कि अगर किसी उपभोक्ता की जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होती है, तो उसे बिजली वितरण कंपनियों को बेचा भी जा सकता है। कोयला आधारित बिजली की तुलना में सौर ऊर्जा न सिर्फ सस्ती है, बल्कि पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त भी है।

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सब्सिडी और सस्ते लोन ने आसान बनाया रास्ता

योजना के तहत प्रति किलोवाट सोलर सिस्टम से रोजाना औसतन 5 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। एक किलोवाट सिस्टम की लागत करीब 60 से 65 हजार रुपये है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से प्रति किलोवाट 45 हजार रुपये तक का अनुदान मिलता है। कुल मिलाकर 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध है। इसके अलावा बैंकों की ओर से 6 से 7 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन की सुविधा भी दी जा रही है।

कानपुर की छतों पर शुरू हुई यह सोलर क्रांति सिर्फ बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं है। यह शहर को आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो रही है।

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