
Kerala Exit Poll Result 2026: सभी 5 राज्यों में वोटिंग खत्म होने के बाद 29 अप्रैल को तमाम सर्वे एजेंसियों ने एग्जिट पोल के अनुमान जारी किए। नतीजों के मुताबिक, केरल में इस बार यूडीएफ की सरकार बनती दिख रही है। बता दें कि केरल में 9 अप्रैल को एक चरण में वोटिंग हुई थी।
2021 के केरल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजों में अधिकतर सर्वे एजेंसियों ने पिनरई विजयन के नेतृत्व वाले सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सत्ता में शानदार वापसी की भविष्यवाणी की थी। 140 सीटों वाली केरल विधानसभा में सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 था। कई बड़ी सर्वे एजेंसियों ने एलडीएफ को दो-तिहाई बहुमत के करीब या स्पष्ट जीत मिलने का अनुमान लगाया था। वहीं, कुछ और एग्जिट पोल्स में मुख्य विपक्षी दल- संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और एलडीएफ के बीच काफी कड़े मुकाबले का अनुमान जताया गया, हालांकि बढ़त लेफ्ट को ही दी गई थी।
केरल के असल नतीजों ने एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणी पर मुहर लगाई और 1977 के बाद पहली बार किसी गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। पिनरई विजयन के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने 99 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सत्ता वापसी की। मुख्य विपक्षी गठबंधन यूडीएफ को 41 सीटें प्राप्त हुईं। एनडीए अपना खाता खोलने में भी विफल रहा और उसका वोट प्रतिशत भी गिर गया।
एग्जिट पोल एक तरह का सैंपल सर्वे होता है, जिसे मतदान के तुरंत बाद किया जाता है। इसका मकसद यह समझना होता है कि वोटर्स ने किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट दिया और उनका रुझान किस तरफ है।
एग्जिट पोल के लिए एक तयशुदा प्रश्नावली तैयार की जाती है। इसमें उम्मीदवार, चुनाव क्षेत्र और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखा जाता है। प्रशिक्षित सर्वे टीम मतदान केंद्रों के बाहर खड़े होकर वोट देकर निकल रहे लोगों से सवाल पूछती है और उनकी राय इकट्ठा करती है।
सर्वे के दौरान वोटर्स से गोपनीय तरीके से उनकी पसंद पूछी जाती है। इसका उद्देश्य उनके मन की बात समझना होता है। इसमें इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि लोगों की पहचान उजागर न हो और वे खुलकर अपनी राय दे सकें।
एग्जिट पोल में सैंपलिंग बहुत अहम होती है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के वोटर्स शामिल हों। इससे समाज के हर वर्ग का सही प्रतिनिधित्व मिल सके और नतीजे ज्यादा संतुलित बन सकें।
सर्वे के दौरान जुटाए गए डेटा का बाद में विस्तार से विश्लेषण किया जाता है। इसी आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं और चुनाव का रुझान किस दिशा में जा सकता है।
एग्जिट पोल के नतीजे मतदान खत्म होने के बाद जारी किए जाते हैं, जिससे एक शुरुआती तस्वीर सामने आती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर बार एग्जिट पोल पूरी तरह सही साबित हों। कई बार इनके अनुमान वास्तविक नतीजों से अलग भी हो सकते हैं।
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